बच्चों में देशभक्ति का जज्बा पैदा कर उन्हें सैन्य अफसर बनाने में उत्तराखंड के भवाली स्थित सैनिक स्कूल घोड़ाखाल की भूमिका अहम रही है।
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देशभक्ति का जज्बा भरता है देवभूमि उत्तराखंड का ये स्कूल
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army school ghorakhal bhowali factory of patriotism
यहां से शिक्षा लेकर कई कैडेट न केवल सैन्य अधिकारी बने हैं बल्कि आईएएस और पीसीएस अधिकारी के रूप में भी देश के विभिन्न प्रांतों में सेवा कर रहे हैं। स्कूल की स्थापना के बाद से अब तक इस स्कूल में 500 से अधिक कैडेटों का चयन राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में हो चुका है।
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21 मार्च 1966 को केंद्र सरकार ने घोड़ाखाल में सैनिक स्कूल की स्थापना की। रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले इस स्कूल का संचालन सैनिक स्कूल सोसायटी करती है। इसका उद्देश्य बच्चों में देशभक्ति और सुरक्षा का जज्बा पैदा करने के साथ ही उनकी प्रतिभा को तराशना है।
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पिछले कई साल से सैनिक स्कूल घोड़ाखाल सर्वाधिक छात्रों को एनडीए में भेजने में सफल रहा है। इसी को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने सैनिक स्कूल घोड़ाखाल को छह बार रक्षा मंत्रालय ट्राफी प्रदान की है। वर्ष 2012 तक स्कूल से 437 कैडेटों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में भेजा जा सका है। अब यह संख्या बढ़कर पांच सौ से अधिक हो चुकी है।
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लेफ्टिनेंट जनरल जेडीएस रावत, मेजर जनरल वीके भट्ट, वीएम कालिया, लेफ्टिनेंट जनरल वीके भाटिया, रिटायर्ड एडमिरल एचसीएच बिष्ट, एयर वाइस मार्शल युगल नेगी की शिक्षा दीक्षा भी इसी स्कूल से हुई है। यही नहीं इस स्कूल से पढ़े राम सुभागा सिंह रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव व मनोज पंत पश्चिम बंगाल काडर के आईएएस अधिकारी, आलम आल नगालैंड के पुलिस महानिरीक्षक और अजय शुक्ला सीतापुर के डीएम रह चुके हैं।
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इस स्कूल में छठी और नवीं कक्षा में प्रवेश होता है। जिसमें 67 फीसदी सीटें उत्तराखंड राज्य के प्रतिभागियों के लिए तथा 33 फीसदी अन्य प्रांतों के प्रतिभागियों के लिए आरक्षित रहती हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य कैप्टन रोहित द्विवेदी विद्यालय के कुशल प्रबंधन के लिए हर संभव प्रयासरत हैं।