चमोली में दशोली ब्लाक की ग्राम पंचायत लासी के प्रसिद्ध जाख नंदा अष्टमी मेले में इस बार किसी बेजुबां का खून नहीं बहा।
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सदियों से चली आ रही बलि प्रथा पर रोक लगने से मेले के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना के बाद चढ़ावे का भैंसा प्रशासन को सौंप दिया।
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यहां जाख मंदिर में बृहस्पतिवार को आयोजित मेले में क्षेत्र के नौ गांवों के देवी-देवताओं के साथ ही ग्रामीणों ने बड़ी संख्या भाग लिया। गांवों से आये भक्तों ने जाख मंदिर में पूजा अर्चना कर कुशलता की मनौती मांगी।
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मेले में पुरानी परंपरा के अनुसार भैंसे की बलि दी जाती थी, लेकिन इस बार प्रशासन ने ग्रामीणों से वार्ता कर मंदिर में होने वाली पशु बलि को रोक दिया।
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इस मुद्दे पर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच खूब बहस हुई।
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प्रशासन की ओर से अधिकारियों ने पशु क्रूरता अधिनियम का हवाला देते हुए पशुबलि रोकने की बात कही, तो ग्रामीण धार्मिक आस्था और परंपरा का हवाला देते रहे।
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बाद में मंदिर समिति के पदाधिकारियों की मध्यस्थता के बाद ग्रामीण पशु बलि रोकने पर सहमत हो गए।
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ग्रामीणों ने बलि के लिये लाये गये भैंसे को पूजा-अर्चना के बाद प्रशासन को सौंप दिया।
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इस दौरान मेले में पहुंचे कार्यवाहक जिला पंचायत अध्यक्ष लखपत बुटोला ने मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए दो लाख की धनराशि देने की घोषणा की।
इस मौके पर मंदिर समिति अध्यक्ष वीरेंद्र रावत, जिला पंचायत सदस्य ऊषा रावत, नयन कुंवर, पुष्कर फरस्वाण, पुष्कर बर्त्वाल, दिगंबर सिंह और भवान सिंह आदि मौजूद थे।