नैनीताल के शेरवुड स्कूल के अपूर्व की स्वच्छता पर ओजस्वी कविता सुनकर अमिताभ बच्चन अभिभूत हो गए। अमिताभ को बरबस यह कहना पड़ा कि कहां से अपूर्व के मन में ऐसे विचार आए और कहां से उसे शब्द मिले। यह हैरान करने वाला है।
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अमिताभ बच्चन
अपूर्व की कविता समूचे स्वच्छता अभियान से बढ़कर है। अमिताभ ने कहा कि वह अपूर्व की इस कविता को अपने फेसबुक एकाउंट सहित तमाम माध्यमों से प्रचारित करेंगे। बता दें कि अमिताभ बच्चने भी शेरवुड कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की है।
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अमिताभ बच्चन
जिला प्रशासन के सहयोग से नैनीताल नागरिक एसोसिएशन की पहल पर विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने तथा उन्हें स्वच्छता बनाए रखने के लिए डीएम दीपक रावत की ओर से शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
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इस कार्यक्रम में शेरवुड के 12वीं के छात्र अपूर्व गौरव ने स्वरचित कविता का पाठ किया। अपूर्व की इस प्रस्तुति का एक न्यूज चैनल ने लाइव प्रसारण किया। इस कार्यक्रम में स्टूडियो में अमिताभ बच्चन भी मौजूद थे।
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- फोटो : indiatimes.com
शेरवुड के पूर्व छात्र रहे बिग बी ने जमकर अपूर्व की सराहना की। डीएम रावत ने भी अपूर्व की प्रस्तुति की सराहना की।
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- फोटो : gettyimages
कविता सुनाने से पहले अपूर्व ने कहा कि वह उस प्रदेश से हैं, जहां दशरथ मांझी जैसे लोग रहे हैं। बिहार के मांझी जब अकेले पहाड़ खोदकर रास्ता बना सकते हैं तो सारा देश मिलकर सफाई क्यों नहीं कर सकता है।
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- फोटो : Getty
कविता की चंद पंक्तियां:-
उठा के हाथ में झाड़ू, अब पूरा हिंदुस्तान चले, हर फूल से हर कली से निवेदन मेरा गली-गली से।
डाल-डाल से पात-पात से हर मजहब से हरेक जात से, कल कल करते नदी नहर से गांव-गांव से शहर-शहर से।
जुबां के मीठे दिल के सच्चे बूढ़े बाबा, छोटे बच्चे।
कि बढ़ो आगे हिंदुस्तान, अब तो जागो हिंदुस्तान, दूर करो तुम आलस को, कूड़ा त्यागो हिंदुस्तान।
अपना यह संकल्प हो, जीवन का ये लक्ष्य रहे, भारत मेरा साफ बने, भारत मेरा स्वच्छ रहे।
हिंदू, मुस्लिम,सिख, ईसाई, हर दिल में यह ख्याल पले, उठे के हाथ में झाडू अब पूरा हिंदुस्तान चले।
देशवासियो स्वच्छ रहना पूजा के समान है, मत भूलो मंदिर, मस्जिद, गिरजा हिंदुस्तान है।
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क्या मक्का या शक्तिपीठ में, कूड़ा फूंक आते हो, या पूजा के घर में यारो गुटका थूक के आते हो।
क्यूबा, कांगो, चीन, रूस देशों में घूमा करते हो, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे के पत्थर चूमा करते हो।
घर में रखते हो साफ-सफाई, बहार क्यों कूड़ा करते हो, तुम सूरज के बेटे हो क्यों दिल को मंदा करते हो।
सड़कों पर कूड़ा फेंक रहे, क्या घर भी गंदा करते हो, क्या चाहोगे दुनिया में, अपनी कूडे़ से पहचान रहे।
साफ रहे बस अपना ही घर, गंदा हिंदुस्तान रहे।
स्वच्छ देश के संदेशों को अब कागज पर कलम चले, भारत स्वच्छ बनाने को, कदम से मिलके कदम चले।
रही देश की आजादी में, जो फिर से वही उमंग पले, उठा के हाथ में झाड़ू, अब के पूरा हिंदुस्तान चले।