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अमित शाह की इस ‘पहेली’ में उलझकर रह गई बीजेपी

Sun, 01 Oct 2017 10:30 AM IST
विपिन बनियाल/ अमर उजाला, देहरादून
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AMIT SHAH
राष्ट्रीय बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने ऐसा पहेली रच दी है जो बीजेपी के गले की फांस बनती जा रही है। इस पहेली का जवाब बीजेपी को सूझ नहीं रहा है।
 
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amit shah in dehradun - फोटो : rajeev gupta
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह संगठनात्मक जिलों की पहेली में उत्तराखंड नेतृत्व को उलझा गए हैं। संगठनात्मक जिलों का पुनर्गठन होना है। मगर इसकी प्रक्रिया तय नहीं हो पा रही है। एक विकल्प, संगठनात्मक चुनाव कराने का है और दूसरा, मनोनयन से जुड़ा है। अगले साल नगर निकाय चुनाव भी हैं। ऐसी स्थिति में चुनाव कराने के विकल्प को बीजेपी आत्मघाती भी मान रही है।

 
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अमित शाह - फोटो : SOCIAL MEDIA
हालांकि जिलों के भीतर जिस तरह से चुनावी प्रतिस्पर्धा का माहौल बन गया है, उसमें तमाम पदाधिकारी दो-दो हाथ करने के लिए तैयार बैठे हैं। बीजेपी जल्द ही मामले का औपचारिक समाधान तलाशने के लिए कोर कमेटी की बैठक करने जा रही है। दो अक्तूबर तक बीजेपी इस मामले में अपने पत्ते खोल सकती है।

 

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amit shah
अपने दो दिनी प्रवास के दौरान बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने संगठनात्मक जिलों पर बेहद चौंकाने वाला निर्णय लिया था। उन्होंने 23 संगठनात्मक जिलों को भंग कर केवल 14 जिले बनाने के निर्देश दिए हैं।

 
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amit shah
सूत्रों के अनुसार, शाह 13 प्रशासनिक जिलों की तर्ज पर इतने ही संगठनात्मक जिले चाहते थे। मगर उन्हें देहरादून जिले की राजधानी की वजह से विशेष स्थिति समझाई गई, तो वे मान गए। बीजेपी को नवरात्र खत्म होते ही अब संगठनात्मक जिलों के पुनर्गठन पर जुटना है। इस क्रम में सबसे पहले उन्हें औपचारिक तौर पर भंग किया जाएगा। इसके बाद पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। वैसे, मौजूदा संगठनात्मक जिलों का कार्यकाल अभी एक साल और बचा है।

 
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amit shah
सूत्रों के अनुसार, निकाय चुनाव की चुनौती नजदीक देख पार्टी के बडे़ नेता मनोनयन को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। इन नेताओं का मानना है कि संगठन चुनाव कराने का ये उपयुक्त वक्त नहीं है। इससे बीजेपी के भीतर गुटबाजी को हवा मिलेगी।

पार्टी के सामने दिक्कत ये भी है कि उसे जो भी फैसला करना है, उसके लिए बहुत समय नहीं बचा है। पार्टी हाईकमान के ये भी निर्देश हैं कि संगठनात्मक जिलों में पुनर्गठन तत्काल होना चाहिए। जिलों में असमंजस ज्यादा दिन रहने की स्थिति बनती है, तो ये भी पार्टी संगठन पर भारी पडे़गा।

 
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श्याम जाजू - फोटो : file photo
राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के निर्देशानुसार हमें जल्द से जल्द जिलों में पुनर्गठन करना है। पुनर्गठन की प्रक्रिया क्या होगी, यह पार्टी दो अक्तूबर तक बनाने की स्थिति में होगी।
-श्याम जाजू, प्रदेश प्रभारी, बीजेपी

-चुनाव और मनोनयन दोनों विकल्प हमारे पास मौजूद हैं। कौन सा विकल्प हमें लेना है, इसका फैसला कोर ग्रुप की बैठक में बहुमत के आधार पर लिया जाएगा।
-अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, बीजेपी
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