Amar Ujala Samvad
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योग और अध्यात्म हमारे जीवन का अभिन्न अंग: गौरांग दास
कार्यक्रम में इस्कॉन जीबीसी और गोवर्धन इकोविलेज के निदेशक गौरांग दास आज सोशल मीडिया के जमाने में समस्या यह आ गई है कि लोग यह नहीं देखते कि उनके पास क्या है, लोग देखते हैं कि दूसरों के पास क्या है। कम्पेयरिंग, कम्प्लेनिंग एंड क्रिटिसाइजिंग। यानी तुलना, शिकायत और आलोचना। ये तीन तरह के कैंसर हैं। इससे बचने की जरूरत है। योग और अध्यात्म हम सभी के जीवन में महत्वपूर्ण क्यों हैं। आप सभी जानते हैं कि भारत में लगभग 70 हजार अस्पताल हैं, लेकिन 20 लाख मंदिर हैं। कोविड काल में कई कारोबार बंद हुए, एक भी मंदिर बंद नहीं हुआ। यहां तक कि कोविड के दौर के बाद मंदिरों में भीड़ तीन से पांच गुना बढ़ गई। प्रश्न उठता है कि भारत इतना आध्यात्मिक देश है, कई पीढ़ियों से भारत को इस क्षेत्र में विश्व गुरु माना गया है, लेकिन युवा पीढ़ी को हम कैसे आश्वस्त कराएं कि योग और अध्यात्म हमारे जीवन का अभिन्न अंग है।