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कैंसर जागरूकता कार्यक्रम: भ्रम से घिरी हैं...मन में हैं कई सवाल...तो विशेषज्ञों की इन बातों को रखें ध्यान

Fri, 31 Oct 2025 11:47 AM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने  बचाव के टिप्स दिए। बड़ी संख्या में महिलाओं और विभिन्न शिक्षण संस्थानों की छात्राओं ने स्तन और सर्वाइकल कैंसर से बचाव के तौर-तरीके सीखे। साथ ही उनकी स्क्रीनिंग भी की गई।

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अमर उजाला फाउंडेशन कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में पहुंचीं कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य - फोटो : अमर उजाला

कैंसर का अब सफल उपचार संभव है, इसलिए इसे छिपाने की बजाय चिकित्सक और अपने परिजनों को बताएं। इससे शुरुआत में ही उपचार कर कैंसर को जड़ से खत्म किया जा सकेगा। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में यह बातें विशेषज्ञों को प्रतिभागी महिलाओं और छात्राओं को बताईं।

अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के सभागार में बृहस्पतिवार को महिलाओं के लिए कैंसर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं और विभिन्न शिक्षण संस्थानों की छात्राओं ने स्तन और सर्वाइकल कैंसर से बचाव के तौर-तरीके सीखे। साथ ही उनकी स्क्रीनिंग भी की गई।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि मातृशक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति सबसे अधिक सजग होना होगा। स्वस्थ नारी ही मजबूत परिवार, समाज, राज्य और राष्ट्र की नींव होती है। महिलाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी आज एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रही है।

 

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कैंसर जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ करते अतिथि - फोटो : अमर उजाला

ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा उपाय समय पर जांच और जागरूकता ही है। उन्होंने छात्राओं से समाज में महिला स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने कई सवाल पूछे। इस दौरान कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि के रूप में राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन और उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना मौजूद रहीं।

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स्तन और सर्वाइकल कैंसर जागरूकता शिविर और कार्यशाला में जानकारी देते विशेषज्ञ - फोटो : अमर उजाला

पैनल सदस्य दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य और वरिष्ठ महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. गीता जैन ने कहा कि स्तन और सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला भारत में एक और दूसरे नंबर के कैंसर है। सर्वाइकल कैंसर से इससे हर आठ मिनट में एक महिला की मौत हो रही है। इसके पीछे के कई कारण हो सकते हैं। इसमें धूम्रपान और निजी अंगों की सही ढंग से साफ-सफाई न करना शामिल है। अब कैंसर का उपचार संभव है, इसलिए इसे छिपाने की आवश्यकता नहीं है।

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विशेषज्ञों से सवाल पूछती छात्रा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

मैक्स अस्पताल की वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रुनू शर्मा ने कहा कि स्तन कैंसर अब शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है। लगातार हो रहा शहरी करण इसके पीछे का मुख्य कारण है। आज देखा गया है कि लोगों की जीवनशैली में लगातार बदलाव हो रहा है। भारत में स्तन कैंसर के प्रति जागरुकता में भारी कमी भी है। महिलाओं को तीसरे-चौथे स्टेज के बाद ही स्तन कैंसर के बारे में पता चल पाता है।

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कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में पहुंची महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

-एम्स ऋषिकेश की वरिष्ठ महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. राजलक्ष्मी मुंथड़ा ने कहा कि महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर आमतौर पर एचपीवी वायरस की वजह से होता है। इस वायरस की चपेट में आने वाली 90 फीसदी महिलाएं स्वस्थ हो जाती हैं।

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चित्रकला व स्लोगन प्रतियोगिता में प्रतिभाग करती छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला

10 प्रतिशत महिलाएं जो इससे संक्रमित रहती हैं, उनमें सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। यह कैंसर 10 से 15 वर्षों में डेवलप होता है। इससे बचने के लिए 9 से 15 साल की किशोरियों को सर्वारिक्स वैक्सीन की दो डोज और 15 से 26 साल तक के लिए तीन डोज लगाई जाती हैं।

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विशेषज्ञों से सवाल पूछती महिला - फोटो : अमर उजाला
कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन की अध्यक्ष वरिष्ठ महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमिता प्रभाकर ने कहा कि स्तन कैंसर का स्क्रीनिंग और अन्य माध्यमों से शुरुआती चरण में ही पहचानना जरूरी है। इसकी पहचान करने के लिए तीन मुख्य स्तंभ होते हैं।

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कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में पहुंची कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य - फोटो : अमर उजाला
इसमें ब्रेस्ट सेल्फ एग्जामिनेशन, क्लीनिकल एक्जामिनेशन और मेमोग्राफी शामिल है। कहा कि आज कल सफल कैरियर की चिंता में महिलाएं देरी से विवाह करती हैं। ऐसे में बच्चे भी देरी से पैदा होता हैं। महिलाएं बच्चों को फीड भी कम करवाती हैं। ये भी ब्रेस्ट कैंसर के मुख्य कारण हैं।

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कैंसल जागरूकता को लेकर नाटक प्रस्तुत करती छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला
कोरोनेशन अस्पताल की वरिष्ठ महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. तुलसी बिष्ट ने कहा कि स्वस्थ महिला से स्वस्थ परिवार को जन्म मिलता है और स्वस्थ से स्वस्थ समाज और राष्ट्र की उत्पत्ति होती है। उन्होंने कहा कि अगर आपको थोड़ी सी भी असहजता होती है तो बिना किसी देरी के चिकित्सक को दिखाएं। आज भी देखा गया है कि लोगों में स्तन कैंसर को लेकर बहुत ज्यादा जागरूकता नहीं है। ऐसे में उनको जब पता चलता है तब तक कैंसर चौथे स्टेज तक पहुंच जाता है। ऐसे में जान का भी खतरा बढ़ जाता है।
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अमर उजाला कैंसर जागरूकता शिविर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय की वरिष्ठ सर्जन डॉ. मोनिका ने कहा कि पर्वतीय इलाकों में महिलाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता काफी कम है। उनको ब्रेस्ट कैंसर होने के बाद पता ही नहीं चल पाता है। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद छात्राओं से अपने परिवार और आस-पास रहने वाले लोगों को स्तन और सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूक करने की अपील की। प्रत्येक महिला जीवनभर में एक बार एचपीवी वायरस की चपेट में अवश्य आती है। ये संक्रमण दो वर्षों में अपने आप खत्म हो जाता है।

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