किसी निराश्रित और अक्षम व्यक्ति को सहारा देकर खड़ा करना सबसे बड़ा धर्म का काम है। जब वह अपने पैरों पर खड़ा होता है तो उसे जितनी खुशी मिलती है, उससे ज्यादा आत्म संतुष्टि मदद करने वाले को मिलती है।
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- फोटो : amar ujala
दान-पुण्य का असली महत्व तभी है, जब वह वास्तविक जरूरतमंद तक पहुंचे। अगर प्रत्येक व्यक्ति अपनी सोच बदले और किसी एक जरूरतमंद की मदद का संकल्प ले तो हम बहुत से लोगों का जीवन बदल सकते हैं। शनिवार को गीता भवन परिसर में दून संस्कृति, श्री सनातन धर्म सभा गीता भवन, हर्षल फाउंडेशन और अमर उजाला फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित दिव्यांग सहायता बहुउद्देश्यीय शिविर का शुभारंभ करते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल ने यह विचार रखे।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में ऐसे शिविरों के आयोजन करने की जरूरत है, ताकि वहां के लोगों को भी लाभ मिल सके। उन्होंने आयोजन से जुड़ी सभी संस्थाओं, उनके प्रतिनिधियों और सहयोगकर्ताओं का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सरकार भी दिव्यांगों के कल्याण के लिए कार्य करेगी। लेकिन जन सहभागिता होने पर इसका व्यापक लाभ मिलेगा। विशिष्ट अतिथि राजपुर विधायक खजानदास ने कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर ऐसे अभियानों और कार्यक्रमों से जुड़कर संतुष्टि महसूस करते हैं। किसी दिव्यांग और अक्षम व्यक्ति को मदद पहुंचाकर आप बेहतर समाज बनाने में सहयोग कर सकते हैं।
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गीता भवन समिति के प्रधान राकेश ओबराय ने कहा कि समिति लगातार समाज हित में ऐसे कार्यों में हिस्सेदारी करती रहेगी। शिविर संयोजिका और दून संस्कृति की अध्यक्ष रमा गोयल ने भरोसा दिलाया कि संस्था राज्य के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे शिविरों के आयोजन का प्रयास करेगी। अगले कुछ माह के भीतर गढ़वाल के किसी क्षेत्र में एक दिव्यांग सहायता शिविर आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन विपिन नागलिया ने किया।
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आयोजन में डा. आरएस गोयल, ब्रिगेडियर केएल सिंह, शोभा वासन, अनिता अग्रवाल, बबीता सुमन, एसएस गोयल, हरि लोहिया, कमलेश अग्रवाल, राजेंद्र गोयल, विवेक अग्रवाल, विनोद गोयल, रंजना, टीना, इंगिता, पुष्पा, जयश्री, रितु गोयल, सेवा सिंह मठारू, रवि गुप्ता, अनु गोयल, अरूणलता, सुधांशु महाराज, रविंद्र कटारिया, अनिल वर्मा, राजू पुरी, अमरीश ओबराय, अशोक गुप्ता, सुमित और गीता भवन इंटर कॉलेज के स्टाफ समेत अन्य ने सहयोग दिया।
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चंपावत व उत्तरकाशी के पूर्व जिलाधिकारी श्रीधर बाबू अदांकी ने अपने संबोधन से मौजूद लोगों के दिलों को छू लिया। उन्होंने कहा कि मुझे आईएएस होने पर उतना गर्व महसूस नहीं होता, जितना एक अच्छा इंसान होने पर होता है। उन्होंने चंपावत का जिलाधिकारी रहने के दौरान के संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि बतौर डीएम वह एक गांव में गए, जो 24 किमी की पैदल दूरी पर था। वहां पटवारी तक जाना पसंद नहीं करते थे।
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गांव में दिव्यांगों को देखकर जब उन्होंने जानकारी ली तो पता चला कि उन्हें किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलता है और उनका कोई दस्तावेज ही नहीं बना। क्योंकि सबसे जरूरी मेडिकल प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए कैंप जिला मुख्यालय में लगता था। किसी भी दिव्यांग के लिए 24 किमी पैदल चलना आसान नहीं था। तब उन्होंने सोचा कि दिव्यांग जिला मुख्यालय नहीं जा सकता, लेकिन जिला मुख्यालय से डॉक्टर यहां आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज जरूरत दिव्यांगों को पास लाने की नहीं, बल्कि उनके पास जाने की है।
कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल ने हंस फाउंडेशन के प्रदेश प्रभारी पद्मेंद्र बिष्ट को विशेष सम्मान दिया। राज्य के विकास में अहम योगदान देने और जरूरतमंदों को उपचार व शिक्षा के लिए धनराशि उपलब्ध कराने पर अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। इस दौरान पद्मेंद्र बिष्ट ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सहायता के रूप में फाउंडेशन आठ से नौ करोड़ रुपये प्रदान कर रही है। इसका दायरा बढ़ाकर प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हंस फाउंडेशन प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए नए अस्पतालों का संचालन भी कर रहा है। इससे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्र के हजारों अभावग्रस्त व गरीब लोगों को फायदा मिलेगा।