अगर आप एल्युमीनियम फॉयल में गर्म खाना रखते हैं तो ये सेहत के लिए खतरनाक है। ये पढ़ने के बाद आप एल्युमीनियम फॉयल का इस्तमान नहीं करेंगे। कई लोग तो फिश, आलू आदि को पकाने के लिए भी फॉयल का इस्तेमाल करते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक है। फॉयल में बंद खाद्य पदार्थ में एल्युमीनियम मेटल मिल जाता है। ये दिमाग, किडनी व हड्डियों पर बुरा असर डालता है। एल्युमीनियम बर्तनों का लगातार प्रयोग भी स्वास्थ्य के लिए हानीकारक हैं।
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एक वेबसाइट की खबर के मुताबिक याददाश्त व हड्डियों पर असर कई साल से दुनियाभर के वैज्ञानिक मानव शरीर में एल्युमीनियम के प्रभाव पर शोध में निष्कर्ष निकाल चुके हैं दिमागी की कोशिकाओं की वृद्धि रुकने के कारण ही एल्झाइमर नामक बीमारी (स्मृति लोप) होती है। शरीर में लगातार एल्युमीनियम जाने से हड्डियों का क्षरण (ऑस्टियोपोरोसिस) होने लगता है।
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खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के सालों बाद भी सरकार ने खाद्य सुरक्षा तथा मानक अधिनियम 2006 तथा विनियम के तहत एल्युमीनियम फॉयल के मानक (ग्रेडिंग) तय नहीं किए।
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यूं तो विश्व स्वास्थ्य संगठन एल्युमीनियम फॉयल को मान्यता देता है, लेकिन साथ में उसका कहना है कि इस धातु की 40 से 60 मिलीग्राम मात्रा रोजाना शरीर में जाने से खतरा नहीं होता।
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शारजाह की अमेरिकन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं डॉ फाथिया मोहम्मद और डॉ ऐस्साम जुबैदी ने अध्ययन में निष्कर्ष निकाला कि एल्युमीनियम फॉयल में बनाए खाने में धातु की मात्रा 400 मिग्रा. मिली। पैक खाद्य में नींबू का रस और टमाटर सॉस मिलाने से वे फॉयल में मौजूद ज्यादा एल्युमीनियम सोखते हैं।
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दोनों शोधकर्ताओं ने 2012 में इंडिया, चाइना व इजिप्ट (मिस्र) में बनी एल्युमीनियम फॉयल पर रिसर्च की थी, जिसकी रिपोर्ट अतंरराष्ट्रीय स्तर के इलेक्ट्रोकैमिकल जर्नल में प्रकाशित हुई। ऐइन शेम्स यूनिवर्सिटी (इजिप्ट) के गडा बस्सियोनी ने अपनी शोध रिपोर्ट में बताया कि फॉयल में लगा एल्युमीनियम खाने में मिल जाता है, इसलिए फॉयल में कभी भी न तो गर्म खाना रखें और न ही पकाना चाहिए।
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हाल में किए गए अध्ययन में बताया गया है कि एल्युमीनियम फॉयल एक दर्द निवारक की तरह काम कर सकता है। अगर आपके जोड़ों में दर्द है तो एल्युमीनियम फॉयल का टुकड़ा अंग पर लपेटकर ऊपर से पट्टी बांध दें (कम से कम आठ घंटे तक)। इसमें कोई विशेष चिकित्सकीय गुण नहीं है। यह प्रयोग नियमित करने से प्रभावित अंग की गर्मी एक ही जगह स्थिर होने से खून का संचार बढ़ जाता है, जिससे नसों में जमा अतिरिक्त फैट पिघलने लगता है और दर्द में राहत मिलने लगती है।
देहरादून के सीनियर फीजिशियन डॉ. प्रवीण पंवार, सीनियर गेस्ट्रो सर्जन डॉ. विपुल कंडवाल और चाइल्ड स्पेलिस्ट डॉ. अतुल आलोक के मुताबिक एल्युमीनियम का बढ़ता प्रयोग शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचाता है। खाना पैक करने की आदतों में बदलाव लाने की जरूरत है। खाने को फॉइल में लपेटने से उसका एल्युमीनियम खाने में घुल जाता है जो याददाश्ता और हड्डियों को नुकसान पहुंचाता है।