इसके साथ ही पानी के स्तर, पहाड़ के स्तर और समुद्र स्तर की भी जानकारी मिलेगी। उन्होंने बताया कि स्केल कम कर दिए जाने से अब नदी बेसिन के नाले भी स्पष्ट हो जाते हैं। इसके साथ यह भी पता चलता है कि नदियों के बाढ़ का पानी किन आबादी वाले इलाकों की गलियों आदि में जा सकता है। उन्होंने बताया कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने अपनी स्थापना के ढाई सौ साल पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अपर महानिदेशक नवीन तोमर, निदेशक धीरज साहा, मैनेजर मधुकर तिवारी, संजय गर्ग, योगेश अग्रवाल आदि रहे।