हर साल बरसात से पहले नदी-नालों के पास बसे लोगों को हटाने के आदेश जारी होते हैं। उन्हें नोटिस भी भेजे जाते हैं। यानी कागज पर होने वाले आदेशों पर कागजी नोटिस जारी होते हैं। इसके बावजूद हर साल भयावह हादसे होते हैं। इस साल भी आमवाला में निगम, प्रशासन और जिम्मेदार विभागों की इस चिट्ठी पत्री के खेल में दो बहनें बह गईं।
बुधवार को बारिश में उफनाए बरसाती नाले में दो सगी बहनें बह गईं। करीब तीन घंटे बाद बड़ी बहन का शव बरामद हो गया जबकि छोटी बहन की तलाश में पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें लगी हुई हैं। देर शाम तक छोटी बहन का पता नहीं चल पाया था। पुलिस ने बड़ी बहन के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया है।
हादसा रायपुर थाना क्षेत्र के तरला आमवाला का है, जहां कुछ लोग बस्ती में झुग्गी झोंपड़ी बनाकर रहते हैं। यहीं पर नाले के किनारे झोंपड़ी के पास दो सगी बहनें खुशी (आठ वर्ष) और रचना (छह वर्ष) पुत्री सुनील पासवान खेल रही थीं। अचानक नाले में पानी का तेज बहाव आया और दोनों बहनों को अपने साथ बहा ले गया।
दरअसल, हर साल बरसात से पहले होने वाली तैयारियों में बेहद महत्वपूर्ण विषय यही होता है। इस साल भी डीएम ने शहर और आसपास की 24 बस्तियों को चिह्नित कर यहां से लोगों को अस्थाई रूप से विस्थापित करने के आदेश जारी किए थे। इन्हें नगर निगम और सिंचाई विभाग को हटाना था। मगर, हाकिम के आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहे। कागजी आदेश अगले विभागों को मिले तो उन्होंने भी नोटिस पर नाम लिखकर भेज दिए।