पुलिस की तफ्तीश के आधार पर उपलब्ध सुराग हम आपके सामने रख रहे हैं। अगर आपके पास भी कोई सुराग है तो सभी के मद्देनजर यह बताना है कि कातिल कौन हो सकता है ? इसके पीछे क्या तर्क है, यह भी स्पष्ट करना है।
यह सब लिखकर आप हमें भेज दें, यह केस जब भी खुलेगा और जिस किसी का अनुमान, पुलिस रिकॉर्ड में आए घटनाक्रम के सबसे नजदीक होगा उसे आकर्षक उपहार दिया जाएगा। यही नहीं, उसके द्वारा प्रेषित तथ्यों को अमर उजाला में प्रकाशित भी किया जाएगा, जो पाठक खुलकर सामने नहीं आना चाहते है, उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी। तो फिर शुरू हो जाइए, द ग्रेट डिटेक्टिव-
2 नवंबर 2018 की बात है। राजघाट के पांडेयहाता की तंग गलियों में रश्मि (35) की हत्या कर दी गई थी। गले पर काटे जाने के निशान थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हुई। इस वारदात की जांच आज भी जारी है, लेकिन पुलिस के हाथ खाली हैं। कत्ल करने वाले खुलेआम घूम रहे हैं। आखिर रश्मि को किसने मारा, इस सवाल से पर्दा नहीं उठ सका।
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वारदात उस समय हुई थी, जब रश्मि घर में अकेली थी।
- फोटो : amarujala
वारदात उस समय हुई थी, जब रश्मि घर में अकेली थी। पिता घर पर नहीं थे। भाई सब्जी लेने के लिए बाजार गया हुआ था। वापस आया तो देखा कि बहन फर्श पर गिरी थी। शोर मचाया और फिर आसपास के लोग भी आ गए। पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन कातिलों को दबोच नहीं सकी। शुरुआती जांच में सगे-संबंधियों पर ही शक हुआ था, लेकिन बाद में पुलिस की जांच धीमी पड़ गई। यह जांच अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। रश्मि का पति से विवाद था और वह मायके में ही रहती थी।
शक के घेरे में
भाई नरेंद्र -पूछताछ के लिए कई बार बुलाया गया। कोई नतीजा निकले इससे पहले लापता
पति- पत्नी से विवाद, तीन साल से अलग रही थी। पुलिस ने बात करने की जहमत नहीं उठाई
कोई और-महिला थी, पति से विवाद था। किसी की बुरी नजर रही हो
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जिस घर में रश्मि का कत्ल हुआ था, उस घर में अब ताला लटका हुआ है।
- फोटो : amarujala
घर में ताला बंद कर कानपुर चले गए भाई-पिता
जिस घर में रश्मि का कत्ल हुआ था, उस घर में अब ताला लटका हुआ है। पड़ोसी बताते हैं कि भाई को पुलिस पूछताछ के लिए कई बार ले गई थी। इससे आजिज आकर ही करीब पांच महीने पहले घर में ताला बंद करके कानपुर चले गए। तब से परिवार के लोग लौटे नहीं हैं। परिवार के लोगों से मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो वह कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुए। आखिर उनकी क्या मजबूरी है, बेटी के हत्यारे को वे सलाखों के पीछे क्यों नहीं देखना चाहते है ?
अभी तक कोई ऐसा सुराग नहीं मिल सका है, जिससे घटना का पर्दाफाश हो सके। प्रयास जारी है।
राजेश पांडेय, इंस्पेक्टर, राजघाट
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