साल 2025 भारतीय महिला खेलों के लिए उम्मीद, सम्मान और इतिहास का साल रहा। यह वो साल था जब बेटियों ने सिर्फ मेडल नहीं जीते, बल्कि सोच बदली, भरोसा जगाया और यह साबित कर दिया कि भारतीय खेलों का भविष्य महिला खिलाड़ियों के मजबूत कंधों पर सुरक्षित है।
साल 2025 भारतीय महिला खेलों के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने वाला वर्ष बन गया। यह सिर्फ जीत और ट्रॉफियों का साल नहीं था, बल्कि उस बदलाव का प्रतीक भी रहा, जिसमें भारतीय बेटियों ने हर खेल, हर मंच और हर चुनौती पर अपनी ताकत साबित की। क्रिकेट से लेकर कबड्डी, मुक्केबाजी से लेकर शतरंज और दृष्टिबाधित खेलों तक, हर मैदान पर तिरंगे की शान बढ़ी और महिला खेलों ने देश को गर्व से भर दिया।
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अंडर-19 महिला विश्व कप
- फोटो : ANI
अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम ने लगातार दूसरी बार खिताब जीता
भारतीय अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम ने टी20 विश्व कप में लगातार दूसरी बार खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। इस टूर्नामेंट की शुरुआत 2023 में हुई थी और पहले ही संस्करण में शेफाली वर्मा की कप्तानी में भारत ने चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था। दो साल बाद, दूसरे संस्करण में निकी प्रसाद की कप्तान में टीम इंडिया ने अपना दबदबा कायम रखते हुए खिताब पर कब्जा जमाया। फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 20 ओवर में महज 82 रन पर रोक दिया गया। जवाब में भारत ने 11.2 ओवर में एक विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। गोंगाड़ी त्रिशा ने तीन विकेट लेने और नाबाद 44 रन बनाने के साथ ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए प्लेयर ऑफ द मैच और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट दोनों अवॉर्ड अपने नाम किए।
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भारतीय महिला क्रिकेट विश्व कप
- फोटो : ANI
महिला वनडे क्रिकेट टीम ने पहली बार विश्व कप जीता
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 52 साल के महिला वनडे विश्व कप इतिहास में पहली बार खिताब जीतकर नया अध्याय लिख दिया। 2025 विश्व कप के फाइनल में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराया। पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने 50 ओवर में सात विकेट पर 298 रन बनाए। जवाब में दक्षिण अफ्रीका 246 रन पर सिमट गई। भारत की इस जीत की असली नायिका दीप्ति शर्मा रहीं, जिन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए पांच विकेट चटका कर मैच को भारत की ओर मोड़ दिया। द. अफ्रीका की कप्तान एल वोल्वार्ट की 101 रन की पारी भी टीम को जीत नहीं दिला सकी।
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भारतीय दृष्टिबाधित महिला क्रिकेट टीम
- फोटो : ANI
भारतीय महिला दृष्टिबाधित टीम बनी पहली टी20 विश्व चैंपियन
भारतीय महिला दृष्टिबाधित टीम ने इतिहास रचते हुए पहले टी20 विश्व कप का खिताब जीत लिया। कोलंबो में खेले गए फाइनल में भारत ने नेपाल को सात विकेट से हराया। पहले बल्लेबाजी करते हुए नेपाल की टीम पांच विकेट पर 114 रन ही बना सकी। जवाब में भारतीय टीम ने 12 ओवर में तीन विकेट पर 117 रन बनाकर आराम से लक्ष्य हासिल किया और इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट की पहली चैंपियन बनी।
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निकहत जरीन
- फोटो : World Boxing
विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल्स में चमकीं महिलाएं
विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल्स 2025 में भारतीय मुक्केबाजों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया और कुल 20 पदक अपने नाम किए, जिनमें नौ स्वर्ण, छह रजत और पांच कांस्य पदक रहे। महिला वर्ग में मीनाक्षी हुड्डा (48 किग्रा), निकहत जरीन (51 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), जैस्मिन लैम्बोरिया (57 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), नूपुर शेओरेन (80+ किग्रा), प्रवीण (60 किग्रा), पूजा रानी (80 किग्रा), नीरज फोगाट (65 किग्रा) और सावित्री बूरा (75 किग्रा) ने स्वर्ण पदक जीते।
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भारतीय महिला कबड्डी टीम
- फोटो : ANI
महिला कबड्डी टीम ने लगातार दूसरी बार विश्व कप जीता
भारतीय महिला कबड्डी टीम ने अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए कबड्डी विश्व कप में लगातार दूसरी बार खिताब जीत लिया। फाइनल में भारत ने चीनी ताइपे को 35–28 से मात दी। टीम इंडिया ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन खेल दिखाया। ग्रुप स्टेज के सभी मैच जीतकर सेमीफाइनल में पहुंची और ईरान को 33–21 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। चीनी ताइपे भी अपराजित रही थी, लेकिन निर्णायक मुकाबले में भारतीय टीम ने अपनी काबिलियत साबित करते हुए खिताब अपने नाम किया।
2025 में भारतीय महिला शतरंज खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम बेहद मजबूती से ऊंचा किया। युवा ग्रैंडमास्टर दिव्या देशमुख ने महिला वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रच दिया और यह साबित किया कि नई पीढ़ी अब विश्व स्तर पर खिताब जीतने में पूरी तरह सक्षम है। वहीं, अनुभवी खिलाड़ी आर. वैशाली ने महिला ग्रैंड स्विस जैसे बड़े टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया और कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई कर भारतीय महिला शतरंज की गहराई को दिखाया। इसके साथ ही ईशा शर्मा ने महिला ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल कर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ी। कुल मिलाकर 2025 भारतीय महिला शतरंज के लिए आत्मविश्वास, निरंतरता और ऐतिहासिक सफलताओं का साल साबित हुआ।