फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

World Cup 2019: बल्ले में मशीन लगाकर उतरेंगे वॉर्नर, ताकि वर्ल्ड कप में बुमराह से ना हो गुमराह

Sun, 09 Jun 2019 04:12 PM IST
Trainee Trainee स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 6
डेविड वॉर्नर - फोटो : social media
ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर विश्व कप के लिए कड़े मुकाबलों की तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं और इसके लिए वो अपने बल्ले पर नए उपकरण का उपयोग कर रहे हैं, जो कि एक सेंसर है। जिसमें बैकलिफ्ट के कोण से लेकर बल्ले की अधिकतम गति जैसे आंकड़े दर्ज होते रहते हैं।
विज्ञापन

2 of 6
डेविड वॉर्नर - फोटो : ht
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने 2017 में बल्ले पर सेंसर लगाने के लिए मंजूरी प्रदान की थी, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज को छोड़कर पिछले दो सालों में किसी ने इसका उपयोग नहीं किया। बैंगलुरू की कंपनी ‘स्मार्ट क्रिकेट’ ने बल्ले के सेंसर के लिए एक खास चिप तैयार की है, जिसका उपयोग वार्नर कर रहे हैं, ताकि उन्हें जसप्रीत बुमराह जैसे गेंदबाजों का सामना करने में मदद मिले।
विज्ञापन

3 of 6
डेविड वॉर्नर - फोटो : File
सेंसर चिप बल्ले के हैंडल के ऊपर लगाई जाती है। बल्लेबाज जब तक बल्लेबाजी कर रहा होता है, तब तक के चिप जो भी आंकड़े हासिल करती है वे ‘क्लाउड स्टोरेज’ के जरिए मोबाइल ऐप में इक्कठें हो जाते हैं।

4 of 6
बुमराह - फोटो : file photo
वार्नर को बल्ले के सेंसर से मिले आंकड़ों से बुमराह जैसे गेंदबाजों का सामना करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। जैसे कि बुमराह की यॉर्कर का सामना करने के लिए बल्ले की अधिकतम गति कितनी होनी चाहिए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बल्ले की गति 70 से 75 किमी होनी चाहिए, लेकिन वार्नर अपने बल्ले को 85 से 90 किमी की गति से उठाने का प्रयास कर रहे हैं।
विज्ञापन

5 of 6
डेविड वार्नर - फोटो : PTI
बुमराह जैसे स्लिंगर के लिए बैकलिफ्ट का कोण लगभग 120-125 के आसपास होना चाहिए और बल्ला पहली स्लिप की तरफ से नीचे आना चाहिए, लेकिन भुवनेश्वर कुमार के सामने बैकलिफ्ट विकेटकीपर की लाइन में होनी चाहिए। स्पिनरों के लिए बैकलिफ्ट का कोण न्यूनतम 160 डिग्री तथा अधिकतम 175 डिग्री होना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
डेविड वॉर्नर - फोटो : File Photo
भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज दीप दासगुप्ता ने पीटीआई से कहा, ‘पहले कोच बैकलिफ्ट के कोण या बल्ले की गति या बल्ले और शरीर के बीच दूरी के लिए अपने नैसर्गिक कौशल का उपयोग करते थे। मेरा मानना है कि अगर सटीक आंकड़े कोच की मदद कर सकते हैं, तो इनका उपयोग किया जाना चाहिए। ’वर्तमान में भारत का कोई भी खिलाड़ी बल्ले पर सेंसर का उपयोग नहीं कर रहा है, जो निकट भविष्य में बल्लेबाजों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें