टीम इंडिया की कप्तानी की जिम्मेदारी मिलने के बाद विराट कोहली ने शानदार काम किया और टीम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। टीम इंडिया ने कोहली के नेतृत्व में बेहतरीन खेल दिखाया और एक के बाद एक विरोधी टीमों को मात दी। कोहली के सफल होने की कहानी संघर्षों से भरी है। 19 दिसंबर तो ऐसा दिन है, जो विराट कोहली की आंखों में आंसू जरूर ले आता है। हालांकि, 11 साल पहले यानी 2006 में युवा विराट को आगे बढ़ने की हिम्मत भी इसी दिन से मिली।
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विराट कोहली
दरअसल, दिल्ली और कर्णाटक के बीच रणजी ट्रॉफी सुपर लीग मैच के तीसरे दिन का खेल पूरा हुआ था। तब 18 साल के कोहली 40 रन बनाकर नाबाद थे और उन्हें अगले दिन बड़ी पारी खेलना थी। कोहली की टीम फॉलोऑन खेल रही थी, जिसे टालने के लिए उन्हें 192 रन की दरकार थी।
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विराट कोहली
- फोटो : BCCI
हालांकि, अगले दिन की सुबह विराट कोहली को जीवन में हैरान कर देने वाली खबर सुनने को मिली। विराट के पिता का इसी दिन देहांत हो गया था। तब पहली बार विराट कोहली की दृढ़ता देखने को मिली, जो फैंस आज उनके ट्रेडमार्क के रूप में देख रहे हैं।
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विराट कोहली
- फोटो : twitter
विराट की जिंदगी में पिता प्रेम कोहली ने एक दोस्त से लेकर मार्गदर्शक की भूमिका निभाई। उनके गुजर जाने से विराट सन्न जरूर रह गए। मगर सुबह अपने पिता का अंतिम संस्कार करके युवा विराट मैदान पर लौटे और बल्लेबाजी करने लगे।
विराट कोहली ने मैदान पर किसी से बात नहीं की और शानदार बल्लेबाजी करते हुए 90 रन बनाए। हालांकि, यह दिन विराट के रनों के लिए नहीं बल्कि उनकी दृढ़ता के लिए याद रखा जाता है। पहली बार हमने विराट को इतनी दृढ़ता से खेलते हुए देखा जो आगे चलकर उनका ट्रेडमार्क बना और उन्होंने क्रिकेट की पिच पर एक के बाद एक रिकॉर्ड तोड़े या यूं कहिए कि रिकॉर्ड तोड़ने का सिलसिला जारी है और आगे भी जारी रहेगा।