विजय शंकर
विजय ने कहा,'ईमानदारी से कहूं तो निदाहास ट्रॉफी ने मुझे इतनी सारी चीजें सिखाई। मैंने इसके बाद सीखा कि तटस्थ कैसे रहा जाए। उतार हो या चढ़ाव, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे हमेशा धैर्य बरकरार रखना होगा और बेपरवाह रहना होगा। मैं चुनौती के लिए तैयार था क्योंकि मुझे पता था कि मुझे एक ओवर फेंकना होगा। और 43वें-44वें ओवर के बाद मैं खुद से कह रहा था कि मुझे किसी भी समय गेंदबाजी सौंपी जा सकती है।'