फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऐसे क्रिकेटर जो मैदान में अपने पिता से भी ज्यादा सफल हुए

Sun, 30 Oct 2016 02:38 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
युवराज सिंह - फोटो : getty
क्रिकेट के इतिहास में कई मशहूर पिता-पुत्र खेले हैं। जिसमें सुनील गावस्कर और उनके पुत्र रोहन गावस्कर भारत के लोकप्रिय पिता-पुत्र जोड़ी थे। अगर तुलना किया जाये तो सुनील गावस्कर के मुकाबले रोहन उतने सफल क्रिकेटर नहीं साबित हुए। इसके अलावा रोजर बिन्नी का भी रिकॉर्ड बेहतरीन रहा लेकिन पुत्र स्टुअर्ट उनके जैसी ऊंचाई नहीं हासिल कर पाए। आइये एक नजर डालते हैं ऐसे पिता-पुत्र जोड़ी पर जिनके बेटे ज्यादा सफल क्रिकेटर बने:
विज्ञापन

ऐसे क्रिकेटर जो मैदान में अपने पिता से भी ज्यादा सफल हुए

2 of 6
रिचर्ड हेडली और वॉल्टर हेडली - फोटो : getty
वॉल्टर हैडली और रिचर्ड हैडली
न्यूज़ीलैंड के तेज गेंदबाज़ रिचर्ड हैडली का दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों में शुमार होता है, टेस्ट में 400 विकेट लेने वाले वह पहले खिलाड़ी थे। इसके अलावा रिचर्ड हार्ड हिटर बल्लेबाज़ भी थे। इसलिए उनका नाम कपिल देव, इमरान खान और इयान बाथम जैसे आलराउंडरों के साथ लिया जाता है।
उनके पिता वाल्टर हैडली ने सिर्फ 11 मैच न्यूज़ीलैंड के लिए खेले। खिलाड़ी के अलावा वह कप्तान, चयनकर्ता और टीम के मेनेजर भी रहे थे। उन्होंने अपना आखिरी मैच 1951 में खेला था। उनके नाम एक शतक भी था।
विज्ञापन

ऐसे क्रिकेटर जो मैदान में अपने पिता से भी ज्यादा सफल हुए

3 of 6
मंसूर अली खान पटौदी - फोटो : getty
इफ्तिखार अली खान और मंसूर अली खान पटौदी
मंसूर अली खान पटौदी ने 21 वर्ष की उम्र में भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाई। लेकिन कुछ ही महीने के बाद के कार दुर्घटना में उनकी दाई आंख की रौशनी चली गयी। लेकिन इस करिश्माई बल्लेबाज़ और कप्तान ने भारत को 1967 में विदेश में पहला टेस्ट जितवाया। 46 टेस्ट मैचों में 35 के करीब औसत से 6 शतक की मदद से उन्होंने 2,793 रन बनाये थे। उनका उच्चस्कोर फिरोजशाह कोटला में इंग्लैंड के खिलाफ 203 रन था।
इफ्तिखार अली पटौदी ने भारत और इंग्लैंड दोनों टीमों के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला था। जबकि उनका अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर मात्र 6 मैचों का था। अपने डेब्यू मैच में उन्होंने इंग्लैंड की तरफ से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1932 में शतक बनाया था। भारत के लिए टेस्ट मैचों में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं था। जिसकी वजह से उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा था।

ऐसे क्रिकेटर जो मैदान में अपने पिता से भी ज्यादा सफल हुए

4 of 6
शॉन पॉलक और पीटर पॉलक - फोटो : getty
पीटर पॉलक और शॉन पॉलक
शॉन पॉलक अपने समय के बेहतरीन तेज गेंदबाज़ी आलराउंडर थे। एलन डोनाल्ड के साथ उन्होंने लम्बे समय तक दक्षिण अफ़्रीकी तेज गेंदबाज़ी का जिम्मा संभाला। हैन्सी क्रोनिये के बाद उन्होंने टीम की कप्तानी का भी जिम्मा संभाला था। पोलक ने 108 टेस्ट मैचों में दक्षिण अफ्रीका की तरफ 421 विकेट लिए जो एक रिकॉर्ड है। वनडे में उनके नाम 387 विकेट है।
शॉन पॉलक के पिता पीटर पॉलाक भी दक्षिण अफ्रीका की तरफ से बतौर तेज गेंदबाज़ खेलते थे। हालांकि वह अपने बेटे की तरह प्रभावी नहीं थे। पीटर ने 28 टेस्ट मैचों में 116 विकेट लिए थे।
विज्ञापन

ऐसे क्रिकेटर जो मैदान में अपने पिता से भी ज्यादा सफल हुए

5 of 6
युवराज सिंह और योगराज सिंह - फोटो : getty
योगराज सिंह और युवराज सिंह
साल 2000 में आईसीसी चैम्पियंस ट्राफी में युवराज ने अपने डेब्यू मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 84 रन की पारी खेली थी। उसके बाद वह भारतीय टीम के नियमित सदस्य बन गये थे। युवराज सिंह ने भारत के लिए कई यादगार पारियां खेलीं। इसके अलावा टी-20 विश्वकप 2007 में युवराज ने 6 गेंदों में 6 छक्के लगाकर भारत की खिताबी जीत में अहम योगदान दिया था। इसके अलावा साल 2011 के विश्वकप में युवराज प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट बने थे।
युवराज के पिता योगराज सिंह पंजाब के तेज गेंदबाज़ थे। 1980/81 के न्यूज़ीलैंड दौरे पर उन्हें टीम में शामिल किया गया था। जहाँ उन्हें एक टेस्ट खेलने को मिला था और उन्हें एक विकेट मिला था। ये टेस्ट उनका आखिरी टेस्ट रहा। इसके अलावा 5 वनडे मैचों में उनके नाम 4 विकेट दर्ज है।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे क्रिकेटर जो मैदान में अपने पिता से भी ज्यादा सफल हुए

6 of 6
मिकी स्टीवर्ट और एलेक स्टीवर्ट - फोटो : getty
मिकी स्टीवर्ट और एलेक स्टीवर्ट
एलेक स्टीवर्ट ने 1989 में श्रीलंका के खिलाफ अपना डेब्यू किया था। उन्होंने कुक के बाद इंग्लैंड की तरफ से सबसे ज्यादा 133 टेस्ट मैच खेले हैं। स्टीवर्ट ने 2003 में अपना आखिरी वनडे मैच खेला था। उनके नाम टेस्ट में 8,463 रन और वनडे में 4,677 रन दर्ज हैं। टेस्ट में उनका उच्च स्कोर 190 है।
उनके पिता मिकी स्टीवर्ट भी एक सलामी बल्लेबाज़ थे। अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू मैच 1962 में उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ खेला। 1963-64 में वह भारत के दौरे पर बतौर उपकप्तान आये थे। उनका करियर छोटा रहा और उनके नाम सिर्फ दो अर्धशतक दर्ज है।

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें