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तिहाड़ जेल में श्रीसंत को पड़ती थी भद्दी गालियां, पांच बार आया था खुदकुशी का ख्याल

Tue, 01 Oct 2019 12:20 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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श्रीसंत - फोटो : अमर उजाला
2013 से पहले एस श्रीसंत की पहचान टीम इंडिया के उस जांबाज खिलाड़ी की थी, जो मुश्किल समय में भी हार नहीं मानता। हारी हुई बाजी को अपने पक्ष में करने के लिए भी जी-जान लगा देता था। श्रीसंत की धारदार गेंदबाजी के बूते ही युवाओं से सजी भारतीय टीम 2007 में पहला वर्ल्ड टी-20 जीतने में कामयाब रही थी, लेकिन फिर स्पॉट फिक्सिंग का वह जिन्न निकला, जिसने इस खिलाड़ी का करियर चौपट कर दिया।
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श्रीसंत
2013 में आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में फंसने के बाद केरल के इस खिलाड़ी ने न सिर्फ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी बल्कि अपनी बेगुनाही साबित करने में सफल रहे हैं। अपने बुरे दौर में तिहाड़ जेल में 26 दिन बीता चुके शांताकुमारन ने एक इंटरव्यू में उसी अनुभव को साझा किया है।
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- फोटो : twitter
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए इंटरव्यू में श्रीसंत तिहाड़ के उन 26 दिनों के बारे में बताया। उन्होंने कहा, 'जेल में एक बल्ब था जो हमेशा जलता रहता था, जिसे वे बंद नहीं करते थे। इस कारण वह सो भी नहीं पाते थे। मैंने उस पर 'रोशनी' नाम से एक गाना भी लिखा।' फिलहाल क्रिकेट से दूर रहते हुए श्रीसंत राजनीति और एक्टिंग से जुड़ चुके हैं।

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- फोटो : bigg boss
बकौल श्रीसंत, 'हां मर्डरर और रेपिस्ट जैसे लोग थे, जो मुझे काफी गालियां दिया करते थे। उनकी हर दूसरी बात में गाली हुआ करती थी। मैं काफी डर गया और मुझे लगा कि इसके लिए कुछ करना पड़ेगा। मैंने उनसे बात करने शुरू कर दी और मुझे याद है उसने कहा ‘तेरे में तो दम नहीं, तेरी तो फट गई।’
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श्रीसंत की माने तो जेल से बाहर आने के बाद भी वह लंबे समय तक डिप्रेशन में थे और उन्हें खास थेरेपी लेनी पड़ रही थी। उन्होंने कहा, 'मैं जब जेल से बाहर आया तो अगले छह महीने तक डिप्रेशन में था। मैं रात भर सो नहीं पाता था। मैं बिना बात के रो पड़ता था।'
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- फोटो : voot
श्रीसंत ने आगे बताया कि वह इस हद तक टूट गए थे कि उनका आत्महत्या करने का मन करने लगा था। बकौल श्रीसंत वह 4 से 5 बार इस अनुभव से गुजरे की उन्हें अपनी जिंदगी खत्म कर देनी चाहिए। श्रीसंत ने कहा कि वह जेल में रहते हुए अक्सर यह सोचते थे कि यह सब कैसे हो गया।
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उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं सोचता था कि मेरे साथ क्यों हुआ, मैं सोचता था कि ऐसा कैसे हो सकता है। क्या मैंने कभी कुछ गलत किया जिसके कारण मेरे साथ यह सब हो रहा है। लेकिन मुझे कोई जवाब नहीं मिला।' श्रीसंत ने माना कि संगीत ने उन्हें डिप्रेशन से बाहर निकलने में मदद की।
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