फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट टीम में युवा बल्लेबाज ऋषभ पंत इसलिए बने चयनकर्ताओं के चहेते

Thu, 19 Jul 2018 09:12 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
विज्ञापन
1 of 7
rishabh pant
युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट के लिए भारत की 18 सदस्यीय टीम में शामिल किया गया है। ऋषभ को इन विशेषताओं की वजह से टीम में जगह मिली है। बता दें कि ऋषभ को टीम में दिनेश कार्तिक के साथ विशेषज्ञ विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में जगह मिली है।
 
विज्ञापन

2 of 7
rishabh pant
बता दें कि इस बार टीम में जगह लेने वाले पंत एकमात्र नए खिलाड़ी हैं। ऋषभ के भारत की ओर से सबसे तेज शतक जड़ने का रिकॉर्ड है।  केवल 19 साल की उम्र में उन्होंने महाराष्ट्र के खिलाफ 308 रनों की पारी खेली थी।

 
विज्ञापन

3 of 7
ऋषभ पंत
ऋषभ ने टाउंटन में वेस्टइंडीज-ए के खिलाफ दूसरे अनौपचारिक टेस्ट में 71 गेंद में नाबाद 67 रन की पारी खेलकर भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। भारत-ए ने दो मैचों की सीरीज 1-0 से जीती थी।

 

4 of 7
rishabh pant dravid
ऋषभ ने झारखंड के खिलाफ एक रणजी मुकाबले में 21 छक्के जड़ दिए थे। ऋषभ पंत मूल रूप से गंगोलीहाट केपाली के रहने वाले हैं और वर्तमान में रुड़की के ढंडेरा में रहते हैं।  ऋषभ पंत ने अपने करियर की शुरुआत रुड़की से ही की है।

 
विज्ञापन

5 of 7
rishabh pant
अपने अच्छे दिनों से पहले पंत ने काफी बुरे दिन भी देखें हैं। एक दौर था जब पंत को गुरूद्वारे में रात गुजारनी पड़ती थी और वहीं लंगर का खाना खाकर वह क्रिकेट की प्रेक्टिस करने जाया करते थे। भारतीय टीम तक पहुंचने तक के सफर से पहले पंत ने बहुत कुछ सहा और कड़ी मेहनत की। इसके बाद जाकर वह आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं।
 
विज्ञापन

6 of 7
rishabh pant
ऋषभ का नाम उस समय चर्चा में आया था, जब वह सचिन तेंदुलकर की तरह अपने पिता राजेंद्र पंत की मौत के अगले दिन मैच खेलने के लिए मैदान पर पहुंच गए थे। इन्हें सिक्सर किंग के नाम से भी जाना जाता है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
rishabh pant
दिग्गज बल्लेबाज राहुल द्रविड़ ने भी विकेटकीपर और बल्लेबाज ऋषभ पंत को भारतीय टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ी करार दिया था। दिल्ली के मशहूर क्रिकेट क्लब सोनेट में ही पंत ने क्रिकेट की बारिकियां सीखी। दिल्ली शहर में उसकी जान पहचान का कोई नहीं था। इसलिए वह मोतीबाग गुरूद्वारे में रूकता था वहीं लंगर खाकर प्रेक्टिस के लिए आता जाता था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें