फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संन्यास के बाद कपिल देव ने बदली जिंदगी, वरना आज कुछ और ही कर रहे होते द्रविड़

Sat, 18 Jul 2020 06:39 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 8
राहुल द्रविड़ और कपिल देव - फोटो : ट्विटर
द्रविड़ पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने कहा कि महान ऑलराउंडर कपिल देव की सलाह ने उन्हें संन्यास के बाद विकल्प तलाशने में मदद की, जिसके बाद उन्होंने भारत ए और अंडर-19 टीमों के कोचिंग पद की जिम्मेदारी संभाली। द्रविड़ ने कहा कि वह थोड़े भाग्यशाली भी रहे कि अपने करियर के अंत में वह इंडियन प्रीमियर लीग की टीम राजस्थान रॉयल्स में कप्तान-सह-कोच की भूमिका निभा रहे थे। यह भी पढ़ें: राहुल द्रविड़ ने सुनाई आपबीती, 22 साल बाद किया टीम से बाहर होने का दर्द साझा
विज्ञापन

2 of 8
राहुल द्रविड़ - फोटो : सोशल मीडिया
द्रविड़ ने भारतीय महिला टीम के कोच डब्ल्यू वी रमन को उनके यूट्यूब चैनल 'इनसाइड आउट' में कहा, 'खेलना बंद करने के बाद (संन्यास लेने के बाद) बहुत ही कम विकल्प थे और मुझे पता नहीं चल रहा था कि क्या करना चाहिए। तो कपिल देव ही थे जिन्होंने मुझे सलाह दी और ऐसा मेरे करियर के अंत के दौरान ही हुआ था। मैं उनसे कहीं मिला और उन्होंने कहा, राहुल सीधे जाकर कुछ भी मत करो, पहले कुछ समय सिर्फ देखो और अलग-अलग चीजें करो और फिर देखो कि तुम्हें वास्तव में क्या पसंद है। मुझे लगा कि यह अच्छी सलाह है।'
विज्ञापन

3 of 8
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान राहुल - फोटो : ट्विटर
इस महान क्रिकेटर ने कहा कि शुरू में उन्हें कमेंटरी करना पसंद आया था, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि वह खेल से थोड़े दूर हैं। द्रविड़ ने कहा, 'मुझे जो चीज सबसे ज्यादा संतोषजनक लगती है वो खेल से जुड़े रहना है और खिलाड़ियों के साथ संपर्क में रहना थी। मुझे कोचिंग जैसी चीज बहुत पसंद थी और जब मेरे पास मौका आया तो मैं भारत ए और अंडर-19 टीमों के साथ जुड़ गया।'

4 of 8
राहुल द्रविड़ - फोटो : ट्विटर
राहुल की माने तो, 'मुझे लगा यह शुरूआत करने के लिए अच्छी जगह थी और मैंने इसे स्वीकार कर लिया और मैंने अब तक इसका काफी लुत्फ उठाया है। मुझे कोचिंग करना काफी ज्यादा संतोषजनक लगता है। विशेषकर कोचिंग का विकास करने में मदद करने वाला हिस्सा, भले ही इसमें भारत ए टीम हो, अंडर-19 टीम या फिर एनसीए (राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी)। इससे मुझे काफी सारे खिलाड़ियों के साथ काम करने का मौका मिला और इसमें मुझे तुरंत नतीजे की चिंता भी नहीं थी जो मुझे लगता है कि मेरे लिए काम करने के लिए अच्छा था।'
विज्ञापन

5 of 8
राहुल द्रविड़
भारत के लिए 1996 से 2012 के बीच 164 टेस्ट में 13,288 रन बनाने वाले इस महान बल्लेबाज ने बीसीसीआई के अंडर-19 खिलाड़ियों को एक विश्व कप तक सीमित करने के फैसले का समर्थन किया। द्रविड़ बेंगलुरू में एनसीए के भी क्रिकेट प्रमुख हैं, उन्होंने कहा, 'महज 15 से 20 खिलाड़ियों के बजाय हम एनसीए में 45 से 50 खिलाड़ियों को सुविधाओं का फायदा दिला सकते थे, जिसमें अच्छे कोच, अच्छे फिजियो, अच्छे ट्रेनर शामिल थे।'
विज्ञापन

6 of 8
राहुल द्रविड़
इसी शो में राहुल द्रविड़ ने अपने क्रिकेटिंग करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर की भी बात की थी। बकौल द्रविड़, '1998 में मुझे वन-डे क्रिकेट से बाहर कर दिया गया था। मुझे अपनी वापसी के लिए संघर्ष करना पड़ा था। मैं तब एक साल तक भारतीय क्रिकेट से बाहर रहा था। मैं सोचने लगा था कि क्या वाकई मैं वन-डे क्रिकेट खेलने लायक हूं भी या नहीं।'
विज्ञापन

7 of 8
राहुल द्रविड़ - फोटो : ट्विटर
24000 से ज्यादा इंटरनेशनल रन बनाने वाले इस बल्लेबाज ने कहा, 'भारत में एक क्रिकेटर बनना आसान नहीं था। तब हमारे जमाने में सिर्फ रणजी ट्रॉफी होती थी और भारतीय टीम थी। आईपीएल नहीं था और रणजी ट्रॉफी में भी जो पैसा मिलता था वह बहुत कम ही होता था। चुनौतियां भी कड़ी हुआ करती थीं और क्रिकेट चुनने के बाद बड़े स्तर पर पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। मैं पढ़ाई में भी बुरा नहीं था और क्रिकेट के अलावा कुछ भी आराम से कर सकता था।'
विज्ञापन

8 of 8
राहुल द्रविड़ - फोटो : ट्विटर
द्रविड़ का वन-डे फॉर्मेट में भी स्ट्राइक रेट धीमा था। इस कारण उन्हें टीम से बाहर किया गया, लेकिन तमाम विपरित हालातों को पार करते हुए द्रविड़ ने वन-डे में दमदार वापसी की और 1999 वर्ल्ड कप में जमकर रन बनाए, वह उस विश्व कप में भारत के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक थे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें