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धोनी ने कहा, 'एक बार फिर से ये काफी मुश्किल सवाल है, क्योंकि उस समय कई सीनियर खिलाड़ियों ने मेरा साथ दिया था। जब मुझे टीम का कप्तान बनाया तब मैं उस मीटिंग का हिस्सा नहीं था। मुझे महसूस होता है कि मेरी ईमानदारी और खेल के प्रति मेरी जानकारी को ध्यान में रखते हुए यह जिम्मेदारी सौंपी गई। मैच की परिस्थिति को पढ़ना काफी अहम होता है। हालांकि उस समय टीम में मैं एक युवा खिलाड़ी था और जब एक सीनियर खिलाड़ी ने मेरी राय पूछी तो मैंने खुलकर अपनी राय दी। शायद यही कारण रहा कि टीम के अन्य खिलाड़ियों के साथ मेरे अच्छे संबंध थे।'