भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में से एक वीरेंद्र सहवाग का कहना कि हर बल्लेबाज को अपने स्टाइल और हुनर से बल्लेबाजी करनी चाहिए। न तो वे किसी को कॉपी करें और न ही किसी को देखकर उसके जैसा बनने का प्रयास करें। यही उनकी हर यंगस्टर को सलाह है और इसी गुरुमंत्र के साथ वे टीम के साथ जुड़े हैं।
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दूसरा सचिन भी नहीं आ सकता और न ही दूसरा सहवाग: वीरेंद्र सहवाग
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वीरेंद्र सहवाग
- फोटो : getty
हैदराबाद के साथ मैच से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए सहवाग ने कहा कि खुद किसी समय पर सचिन तेंडुलकर बनना चाहते थे। उन्हें फॉलो करने के साथ साथ उन्हें कॉपी भी करते थे। लेकिन जल्द ही उन्होंने ये समझ लिया कि वे सचिन नहीं बन सकते, बेहतर है वे सहवाग ही बनकर खुद को साबित करें। वीरू ने इसके बाद अपने ही स्टाइल में बल्लेबाजी की और एक नई पहचान बनाई।
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क्रिकेटर मनन वोहरा
सहवाग यही सलाह किंग्स के ओपनर और चंडीगढ़ के स्टार मनन वोहरा को भी देते हैं। वीरू ने कहा कि मनन अच्छे बल्लेबाज हैं और एक शानदार फॉर्म में हैं। वे मनन वोहरा हैं और बेहतर होगा वे अपने ही स्टाइल और कैलिबर से बल्लेबाजी करें। न तो वे मैक्सवेल को फॉलो करें और न ही सहवाग जैसे शॉट्स लगाने की सोचें। हम एक सीनियर को देखकर उससे सीख सकते हैं, उसे कॉपी नहीं कर सकते।
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मनन वोहरा
- फोटो : ESPN
वीरू ने मनन के बारे में बात करते हुए कहा कि वे टीम के लिए हर मैच में रन जुटा रहे हैं। एक मैच में उन्होंने अकेले ही बल्लेबाजी की और 95 रन की वो यादगार पारी खेलकर वो किंग्स को जीत दिलाने के बेहद करीब थे। उन्होंने जो भी अभी तक हासिल किया है उसका क्रेडिट मुझे और बाकी टीम को नहीं बल्कि दूसरे ओपनर हाशिम आमला को है।
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हाशिम अमला
- फोटो : IPL
वे बेहतरीन खिलाड़ी है और मैदान के बाहर व अंदर दोनों ही जगह पर वे युवाओं के साथ बात करते हैं। सहवाग ने कहा कि अमला सफर के दौरान, टीम मीटिंग के बाद, बैटिंग पर जाने से पहले हर जगह मनन को एडवाइज देते रहते हैं। मनन की शानदार फॉर्म का श्रेय उन्हीं को जाता है। वे एक महान खिलाड़ी हैं और खुद भी अच्छी फॉर्म में हैं।
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वीरेंद्र सहवाग
- फोटो : getty
सहवाग का मानना है कि आईपीएल एक तेज फॉर्मेट है और इसमें आपको बने रहने के लिए मजबूत माइंडसेट की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि एक युवा 22-23 साल की उम्र में खेलने के लिए आता है तो उसका माइंडसेट किसी और तरह का होता है। उसे स्थिर होने में 4 से 5 साल लगते हैं। हमारा काम है कि उसका माइंडसेट जल्दी बेहतर बनाए जिससे उन्हें ये 4-5 साल न लगें।
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वीरेंद्र सहवाग
- फोटो : getty
सहवाग का मानना है कि टीमों के साथ भारतीय कोच होना बेहतर होता है। विदेशी खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेटर्स के बारे में जानकारी नहीं होती। जब उन्हें जानकारी नहीं होगी तो वे कैसे उनके साथ काम कर सकेंगे। सहवाग ने कहा कि यदि खिलाड़ी टीम की रन रेट बनाएं रखें, तो स्ट्राइक रेट बनी रहती है।