सचिन तेंदुलकर
टेस्ट में 200 मैच खेल कर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले तेंदुलकर ने कहा कि ऐसे कई खिलाड़ी है जो आक्रामक होना चाहते हैं, लेकिन उसका इस्तेमाल करने के लिए निरंतरता जरूरी है और सहवाग ऐसा करने में सक्षम थे। वह क्रम (सलामी बल्लेबाजी) उसके मुफीद था। (रोहित के लिए) अभी हमें इंतजार करना होगा कि यह योजना कैसे काम करती है। सलामी बल्लेबाज के तौर पर मानसिकता की बात करते हुए कि सहवाग ने सफलता के साथ बुरा दौर भी देखा था, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने खेलने के तरीकों को नहीं बदला।