आईपीएल नीलामी के बाद राजस्थान की टीम को लोग मजबूत नहीं मान रहे थे। क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना था टीम के क्रिकेट डायरेक्टर कुमार संगकारा ने बल्लेबाजी में किसी बड़े स्टार को नहीं खरीदा था। इसके लिए उनकी आलोचना भी हुई, लेकिन उन्होंने सबको गलत साबित कर दिया।
आईपीएल के फाइनल में राजस्थान रॉयल्स की टीम गुजरात टाइटंस के खिलाफ हार गई। टीम 14 साल बाद खिताबी मुकाबले में पहुंची थी, लेकिन अंतिम बाधा पार नहीं कर पाई। वहीं, गुजरात ने पहली बार इस टूर्नामेंट में हिस्सा लिया और सीधे फाइनल जीत लिया। इस हार के बावजूद राजस्थान के लिए लंबे समय बाद कोई सीजन शानदार रहा। आईपीएल नीलामी के बाद राजस्थान की टीम को लोग मजबूत नहीं मान रहे थे। क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना था टीम के क्रिकेट डायरेक्टर और कोच कुमार संगकारा ने बल्लेबाजी में किसी बड़े स्टार को नहीं खरीदा था। इसके लिए उनकी आलोचना भी हुई। श्रीलंका के इस दिग्गज ने टीम को एकजुट किया और सही जगह पर सही खिलाड़ियों का इस्तेमाल किया। यहां हम राजस्थान के दबदबे की 10 वजह बता रहे हैं।
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1. नीलामी में टीम को बदला
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राजस्थान रॉयल्स
- फोटो : IPL/BCCI
टीम मैनेजमेंट में नीलामी में टीम को बदलने का काम किया। आधे से ज्यादा पुराने खिलाड़ियों को बाहर कर दिया। देवदत्त पडिक्कल, शिमरॉन हेटमायर, रविचंद्रन अश्विन, युजवेंद्र चहल, ट्रेंट बोल्ट, प्रसिद्ध कृष्णा, ओबेड मैकॉय जैसे उपयोगी खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया। अश्विन के पास बहुत अनुभव है, लेकिन पिछले कुछ सालों से सीमित ओवरों में उनका प्रदर्शन ठीक-ठाक नहीं रहा है। बोल्ट और चहल को उपयोगी माना जाता है। प्रसिद्ध कृष्णा भारत के उभरते हुए तेज गेंदबाज हैं। जोस बटलर, संजू सैमसन, यशस्वी जायसवाल को रिटेन करने के बाद इनके इर्द-गिर्द संगकारा ने टीम को बनाया।
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2. संजू सैमसन पर विश्वास कायम रखा
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संजू सैमसन
- फोटो : IPL/BCCI
आईपीएल में यह ट्रेंड रहा है कि एक-दो सीजन में टीम के बेहतर प्रदर्शन नहीं करने पर कप्तान को बदल दिया जाता है। पिछले कुछ सालों में पंजाब और कोलकाता की टीम इस मामले में शीर्ष पर रही हैं। राजस्थान ने संजू सैमसन को कप्तानी सौंपकर भविष्य की योजना बनाई। इस बार सीजन शुरू होने से पहले मीडिया में ऐसी खबरें आईं कि सैमसन टीम को छोड़ना चाहते है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। राजस्थान ने सैमसन पर विश्वास कायम रखा। उनकी कप्तानी में लगातार सुधार देखने को मिला।
3. जोस बटलर की बल्लेबाजी
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जोस बटलर
- फोटो : IPL/BCCI
इंग्लैंड का यह विस्फोटक बल्लेबाज अपने करियर के सबसे बेहतरीन दौर में है। बटलर ने सीजन में 800 से ज्यादा रन बना दिए। ऐसा आईपीएल के इतिहास में सिर्फ तीसरी बार ही हुआ है। विराट कोहली और डेविड वॉर्नर ने 2016 में 800 से ज्यादा रन बनाए थे। बटलर ने करीब-करीब हर मैच में टीम बेहतरीन शुरुआत दी। कुछ मुकाबलों में 10 ओवरों तक धीमी बल्लेबाजी की और बाद में तेजी से रन बनाए। राजस्थान की जीत में उनका सबसे बड़ा योगदान है।
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4. कुमार संगकारा ने सही रणनीति बनाई
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लसिथ मलिंगा और कुमार संगकारा
- फोटो : IPL/BCCI
श्रीलंका के बेहतरीन कप्तान माने जाने वाले कुमार संगकारा ने टीम को पूरी तरह बदलने का काम किया। पहले तो उन्होंने युवा खिलाड़ियों पर विश्वास जताया और फिर नीलामी में कुछ अनुभवी खिलाड़ियों को खरीदकर टीम को मजबूत बनाया। अश्विन को बल्लेबाजी में बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल किया। अश्विन की पारी ने ही राजस्थान को टॉप-2 में पहुंचाया था। संगकारा ने सैमसन पर काम किया। संजू की कप्तानी में बदलाव देखने को मिला। वो पहले की तरह मुश्किल परिस्थितियों में घबराते नहीं हैं। हर टीम के लिए संगकारा ने अलग रणनीति बनाई और उसी अनुसार खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया।
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5. चहल और अश्विन की जोड़ी
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अश्विन के साथ युजवेंद्र चहल
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भारतीय क्रिकेट के दो बड़े स्पिनर जब एक ही टीम में हो तो वह काफी मजबूत होगी ही। राजस्थान के लिए ऐसा ही हुआ। दिल्ली ने अश्विन और आरसीबी ने चहल को टीम से बाहर किया। इन दोनों को राजस्थान ने खरीदकर चौंका दिया। इस जोड़ी ने मिडिल ओवरों में विपक्षी टीम को काफी परेशान किया। चहल ने सबसे ज्यादा 26 और अश्विन ने 12 विकेट लिए। इस जोड़ी ने राजस्थान को फाइनल तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।
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6. मजबूत गेंदबाजी लाइन-अप
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ट्रेंट बोल्ट
- फोटो : IPL/BCCI
पिछले सीजन में राजस्थान की टीम अपनी गेंदबाजी के कारण हारी थी। इस बार टीम मैनेजमेंट इस विभाग में सबसे ज्यादा काम किया। न्यूजीलैंड के अनुभवी तेज गेंदबाज ट्रेंट बोल्ट और अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को टीम में शामिल किया। इन दोनों का साथ देने के लिए प्रसिद्ध कृष्णा और युजवेंद्र चहल को शामिल किया। टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में ओबेड मैकॉय ने कमाल का प्रदर्शन किया। इस तरह पांच गेंदबाज टीम के पूरे हो गए। गेंदबाजी के कारण ही राजस्थान को इतनी ज्यादा सफलता मिली।
7. युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का मिश्रण
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कुलदीप सेन और रियान पराग
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फ्रेंचाइजी ने इस बार युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का सही मिश्रण बनाया। संजू सैमसन, यशस्वी जायसवाल, रियान पराग, देवदत्त पडिक्कल, प्रसिद्ध कृष्णा, शिमरॉन हेटमायर और ओबेड मैकॉय जैसे युवा खिलाड़ियों को साथ देने के लिए जोस बटलर, अश्विन, बोल्ट और चहल को टीम में रखा। इससे टीम संतुलित हुई और जीत हासिल करने में सफल रही।
8. ओबेड मैकॉय के रूप में मिला डेथ बॉलर
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ओबेड मैकॉय
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राजस्थान के पास पहले से ही चार गेंदबाज थे। बोल्ट, कृष्णा, चहल और अश्विन अच्छा काम कर रहे थे, लेकिन पांचवें गेंदबाज की कमी टीम को लगातार खल रही थी। 18 अप्रैल को पहली बार राजस्थान ने उन्हें कोलकाता के खिलाफ टीम में शामिल किया। उसके बाद से मैकॉय ने डेथ ओवरों में शानदार गेंदबाजी की। उन्होंने छह मैचों में 11 विकेट लिए। एक मैच में तीन, तीन मैचों में दो-दो और दो मैचों में एक-एक विकेट अपने नाम किया।
9. ट्रेंट बोल्ट और प्रसिद्ध कृष्णा की जोड़ी
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प्रसिद्ध कृष्णा
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ट्रेंट बोल्ट मुंबई इंडियंस में जसप्रीत बुमराह के जोड़ीदार थे। दोनों ने मुंबई की टीम चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। अब बोल्ट राजस्थान में हैं। उनके साथ बुमराह जैसा कोई अनुभवी गेंदबाज तो नहीं है, लेकिन उन्होंने प्रसिद्ध के साथ मिलकर जोड़ी बनाई। दोनों ने पावरप्ले में बेहतरीन गेंदबाजी की। दोनों मिडिल और डेथ ओवरों में भी गेंदबाजी करते नजर आए।
शिमरोन हेटमायर और रविचंद्रन अश्विन
- फोटो : IPL/BCCI
टीम किसी एक मैच फिनिशर पर निर्भर नहीं रही। उसके पास निचले क्रम में तीन ऐसे बल्लेबाज थे, जिन्होंने अलग-अलग मैचों में मैच को फिनिश किया। शिमरॉन हेटमायर, अश्विन और रियान पराग ने अलग-अलग मैचों में आखिरी ओवरों में तेजी से रन बनाए और अहम भूमिका निभाई।