फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आईपीएल डेब्यू में अर्धशतक लगाने वाले देवदत्त के लिए द्रविड के स्कूल ने तोड़ी कन्नड़ की अनिवार्यता

Wed, 23 Sep 2020 07:54 AM IST
Rajeev Rai अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
देवदत्त पडीक्कल - फोटो : social media
क्रिकेट का जुनून देवदत्त पडीक्कल के परिवार को हैदराबाद से बंगलूरू खीच लाया। यह कोई छोटा फैैसला नहीं था। बंगलूरू आने के लिए देवदत्त के पिता को अपना जमा-जमाया व्यापार हैदराबाद से हटाना था। उन्होंने बेटे को बंगलूरू में क्रिकेट सिखाने के लिए यह जोखिम भी उठा लिया।  बंगलूरू में बात जब एडमीशन की आई तो कन्नड़ आड़े आ गई जो देवदत्त को आती नहीं थी, लेकिन अपनी बल्लेबाजी के दम पर इस खब्बू बल्लेबाज ने राहुल द्रविड, रोबिन उथप्पा जैसेे क्रिकेटरों को निकालने वाले सेंट जोसेफ ब्वाएज स्कूल के प्रिंसिपल को कन्नड़ के बदले हिंदी देकर एडमीशन देने पर मजबूर कर दिया।
विज्ञापन

2 of 5
देवदत्त पडीक्कल - फोटो : social media
क्रिकेट और पढ़ाई सब में अव्वल है देवदत्त
देवदत्त की अकादमी कर्नाटक इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिकेट के कोच इरफान सेत अमर उजाला से खुलासा करते हैं कि 11 साल की उम्र में वह उनके पास अकादमी में आया था। उसका एडमीशन उस वक्त चुनौती बन गई थी। सीबीएसई को छोड़ हर स्कूल में कन्नड़ की अनिवार्यता थी और उसे कन्नड़ आती नहीं थी। फिल्म अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का भाई करुणेश शर्मा उनकी अकादमी में खेलता था। वह अच्छा  क्रिकेटर था और सीबीएसई के आर्मी पब्लिक स्कूल में था। उसी के दम पर उन्होंने देवदत्त का इस स्कूल में दाखिला करा दिया, लेकिन यह स्कूल क्रिकेट के लिए बड़ा नहीं था। 
विज्ञापन

3 of 5
देवदत्त पडीक्कल - फोटो : social media
अकेले दम पर सेंट जोसेफ स्कूल को हराया
एक दिन आर्मी स्कूल और सेंट जोसेफ स्कूल का मैच था, जिसमें देवदत्त ने अकेले दम पर सेंट जोसेफ स्कूल को हरा दिया। सेंट जोसेफ को हराना बड़ी बात थी। यह नामी क्रिकेटरों का स्कूल था। फिर क्या था उस मैच के बाद सेंट जोसेफ स्कूल के प्रिंसिपल अपने यहां देवदत्त के एडमीशन के पीछे पड़ गए। उनसे कहा गया कि देवदत्त को कन्नड़ नहीं आती है। प्रिंसिपल ने कहा कोई बात नहीं, इसे हिंदी विषय दिया जाएगा। तब से देवदत्त ने न सिर्फ क्रिकेट में बल्कि वहां पढ़ाई में भी झंडे गाड़े। हाईस्कूल में इस क्रिकेटर ने महज एक माह की पढ़ाई में 95.3 और 12वीं 90 प्रतिशत से ऊपर अंक हासिल किए। अभी वह कॉमर्स से सेंकेड ईयर कर रहा है।

4 of 5
गौतम गंभीर-विराट कोहली - फोटो : सोशल मीडिया
गौतम गंभीर केे हैं प्रशंसक, विराट बने मेंटर
देवदत्त की पारी देखने के बाद इरफान बताते हैं कि कोरोना की वजह से जितनी निराशा और दबाव थे, वह एक झटके  में दूर हो गया। इरफान के मुताबिक देवदत्त बचपन से गौतम गंभीर के बड़े प्रशंसक रहे हैं। अब वह विराट कोहली के संरक्षण में हैं। इसका बड़ा प्रभाव पड़ा है। कोच खुलासा करते हैं कि उनके पास गियर बदलने की काबलियत है। लंबे संस्करण में वह उसी अनुसार बल्लेबाजी करते हैं और वन-डे, टी-20 में उसके अनुरुप अपने को ढाल लेते हैं। यही काबिलियत उन्हें विशेष बनाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
आरसीबी की कोविड वॉरियर जर्सी - फोटो : अमर उजाला
पूरा परिवार है क्रिकेट का दीवाना
सिर्फ देवदत्त ही नहीं बल्कि उनका पूरा परिवार क्रिकेट का दीवाना है। उन्हें बचपन से ही क्रिकेट का माहौल मिला है। उनके परिवार को विश्वास है कि वह एक दिन भारत के लिए जरूर खेलेगा। इरफान यह भी कहते हैं कि यही समय है जब उसे सफलता नशा अपने सिर पर नहीं चढ़ने देना है। हालांकि वह अपने लक्ष्य के प्रति बेहद केंद्रित है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें