किसी भी फिल्म में एक हीरो होता है, कैमरा जिसके पीछे पूरी फिल्म में भागता रहता है। ठीक उसी तरह क्रिकेट का मुख्य किरदार होती है गेंद। जिधर गेंद उधर-उधर खिलाड़ी। अंपायर से लेकर बल्लेबाज, यहां तक कि स्टेडियम में बैठे दर्शक भी उसी गेंद पर नजर गड़ाए रखते हैं। कैमरों के लेंस भी उसी गेंद को कैद करने को आतुर होते हैं, चूकीं इस खेल की हीरोइन गेंद है इसलिए उसके लुक में भी बदलाव होते रहे हैं।
1877 में लाल गेंद से शुरू हुआ टेस्ट क्रिकेट का सफर अपनी गुलाबी मंजिल तक तो पहुंच चुका है, लेकिन सफर अब भी जारी है। टीम इंडिया डे-नाइट टेस्ट में प्रवेश कर रही है। जिसमें गुलाबी गेंद इस्तेमाल होगी। भारतीय टीम पहली बार एक पिच पर पांच दिन डे-नाइट क्रिकेट खेलेगी और वह पिच होगी ईडन गार्डंस की।
डे-नाइट टेस्ट की शुरुआत 27 नवंबर 2015 को हो गई थी। एडीलेड की दूधिया रोशनी में आमने-सामने थे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड। भारत-बांग्लादेश के अलावा टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले सभी प्रमुख देश डे-नाइट टेस्ट खेल चुके हैं। डे-नाइट टेस्ट को लेकर तमाम बातें चर्चा में हैं, लेकिन सबसे अधिक जो सुर्खियों में है, वह गुलाबी गेंद।
तो आइए जानते हैं इस पिंक बॉल के बारे में सबकुछ।