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अब इस क्रिकेटर ने खड़े किए 'विराट नीति' पर सवाल, टीम चयन को लेकर निकली भड़ास

Sun, 28 Jul 2019 05:08 PM IST
Rohit Ojha स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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रवि शास्त्री और विराट कोहली - फोटो : सोशल मीडिया
हर खिलाड़ी अपने करियर को सुरक्षित करने की इच्छा रखता है और श्रेयस अय्यर भी इससे अलग नहीं हैं। उनका मानना है कि टीम में अंदर बाहर होना सही स्थिति नहीं है, इससे लंबे समय में एक खिलाड़ी के आत्मविश्वास में कमी आती है। आईपीएल के सबसे कम उम्र के कप्तान (24 साल) अय्यर ने सात साल में पहली बार अपनी टीम दिल्ली कैपिटल्स को प्ले-ऑफ में पहुंचाया। वह कैरेबियाई सरजमीं में होने वाली आगामी सीमित ओवरों की श्रृंखला की तैयारी में जुटे हैं। 
 
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Shreyas Iyer - फोटो : social Media
श्रेयस का चयन दूसरी बार राष्ट्रीय टीम में हुआ है। वह चाहते हैं कि उन्हें कुछ और मौके मिलें जिससे उन्हें टीम में जगह पक्की करने में मदद मिलेगी। अय्यर ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा कि, ‘अगर आप बेहतरीन प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं तो आपको खुद को साबित करने और परिस्थितियों के अनुकूल ढलने के लिए कुछ मौकों की जरूरत है।’ 
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Shreyas Iyer
उन्होंने कहा कि अगर आप टीम के अंदर बाहर होते रहते हैं तो यह खिलाड़ी के आत्मविश्वास के लिए एक अच्छा नहीं है और आप खुद की प्रतिभा पर शक करना शुरू कर देते हो। अगर आप एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं तो आपको कुछ समय चाहिए। मुंबई के इस खिलाड़ी ने छह वनडे और इतने ही टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। घरेलू और ए स्तर पर लगातार निरंतर प्रदर्शन करने वाले अय्यर ने कहा कि कभी कभार आप धैर्य भी खोने लगते हो लेकिन एक ही मंत्र है कि अच्छा प्रदर्शन करें। 

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Shreyas Iyer
यह पूछने पर कि जब आपकी लगातार अनदेखी की जाती है तो उन्होंने कहा कि हां, आप संयम खोना शुरू कर देते हो, लेकिन चयन आपके हाथों में नहीं होता। आप सिर्फ प्रदर्शन, प्रदर्शन और प्रदर्शन ही कर सकते हो और मुझे यही करने में मजा आता है। उन्होंने कहा कि आपको प्रदर्शन करते रहना होता है और लोगों को यह दिखाते रहना होता है कि आप शीर्ष स्तर पर खेलने के काबिल हो। एक बार आप ऐसा कर लेते हो तो आप कभी भी मुड़कर नहीं देखते। 
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अंबाती रायुडू - फोटो : सोशल मीडिया
विराट-शास्त्री के कार्यकाल में हर दूसरे मैच में टीम में बदलाव होता रहा है। इसे लेकर कई बार कोच-कप्तान की जोड़ी मीडिया और एक्सपर्ट तक को हैरान करती रही है। खुद खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी डगमगाने लगता है। अंबाती रायुडू, मनीष पांडेय, कुलदीप यादव का प्रदर्शन और फॉर्म इसका गवाह रहा है।
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