यशस्वी ने हमेशा की तरह हार नहीं मानी और ऑस्ट्रेलिया की सबसे मुश्किल पर्थ की पिच पर शतक जड़ा। यह उनका ऑस्ट्रेलिया में पहला टेस्ट है और उसी में उन्होंने शतक जड़ दिया। इसी के साथ उन्होंने कई रिकॉर्ड भी बनाए।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ टेस्ट की दूसरी पारी में यशस्वी जायसवाल ने शतक जड़ा। यह उनक टेस्ट करियर का चौथा शतक रहा। अभी तक उन्होंने सिर्फ 15 टेस्ट खेले हैं और उसमें चार शतक जड़ चुके हैं। इनमें दो दोहरे शतक भी हैं। यशस्वी भारत के सबसे टैलेंटेड खिलाड़ियों में से एक हैं। ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले जब कंगारू खिलाड़ियों से पूछा गया था कि उन्हें भारत के कौन से बल्लेबाज से खतरा है तो मार्नस लाबुशेन, स्टीव स्मिथ और पैट कमिंस जैसे खिलाड़ियों ने यशस्वी का नाम लिया था। पहली पारी में शून्य पर आउट होने के बाद किसी ने नहीं सोचा था कि वह इतनी जबरदस्त वापसी करेंगे।
हालांकि, यशस्वी ने हमेशा की तरह हार नहीं मानी और ऑस्ट्रेलिया की सबसे मुश्किल पर्थ की पिच पर शतक जड़ा। यह उनका ऑस्ट्रेलिया में पहला टेस्ट है और उसी में उन्होंने शतक जड़ दिया। इसी के साथ उन्होंने कई रिकॉर्ड भी बनाए। हालांकि, एक बात जो सबसे महत्वपूर्ण है, वह ये है कि पर्थ में जिस भी भारतीय बल्लेबाज ने शतक बनाया है, वह आगे चलकर देश का महान बल्लेबाज बना है। चाहे वह सुनील गावस्कर हों, या फिर सचिन तेंदुलकर या फिर विराट कोहली, अब इसी राह पर यशस्वी भी हैं। यशस्वी दूसरी पारी में 161 रन बनाकर आउट हुए। उन्हें मिचेल मार्श ने स्टीव स्मिथ के हाथों कैच कराया। अपनी पारी में यशस्वी ने 15 चौके और तीन छक्के लगाए।
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यशस्वी शतक लगाने के बाद
- फोटो : BCCI
इन दिग्गजों की फेहरिस्त में शामिल हुए यशस्वी
गावस्कर ने 1977 में पर्थ के वाका स्टेडियम में दूसरी पारी में 127 रन बनाए थे। यह उनके करियर का एक खास दौर था और वह आगे चलकर भारत के लीजेंड्री बल्लेबाज बने। या फिर चाहे वह मोहिंदर अमरनाथ हों। मोहिंदर ने 1977 में पर्थ के वाका में 100 रन बनाए थे। मोहिंदर भारत के दिग्गज खिलाड़ियों में से एक माने जाते हैं। इसी तरह 1992 में पर्थ के वाका में ही ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट में सचिन ने भारत की पहली पारी में 114 रन बनाए थे। वह सचिन के करियर का शुरुआती दौर था और आगे चलकर जो उन्होंने रिकॉर्ड बनाए, उन्हें अब तक कोई नहीं छू सका।
इसी तरह विराट कोहली ने 2018 में पर्थ के वाका में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत की पहली पारी में 123 रन बनाए थे। विराट ने बल्लेबाजी में कई कीर्तिमान रचे। अब यशस्वी ने भी कमाल कर दिया है और उन्हें आने वाले समय का बड़ा खिलाड़ी माना जा रहा है। खुद ये दिग्गज भी यशस्वी की तारीफ कर चुके हैं। कमेंट्री के दौरान पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर वसीम अकरम ने भी यशस्वी की खूब तारीफ की और उन्हें सबसे दिलचस्प युवा क्रिकेटर बताया। भले ही ये पिच वाका नहीं हो, लेकिन नए ऑप्टस स्टेडियम में भी रन बनाना आसान नहीं है।
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यशस्वी जायसवाल
- फोटो : BCCI
यशस्वी दो दिनों में 200 ओवर बल्लेबाजी अभ्यास किया
यशस्वी ने पर्थ की तेज गेंदबाजों की मददगार पिच से सामंजस्य बैठाने के लिए कड़ा अभ्यास किया जिसमें दो दिनों में लगभग 200 ओवर की बल्लेबाजी अभ्यास शामिल है। यशस्वी ने इंडियन प्रीमियर लीग में राजस्थान रॉयल्स के क्रिकेट निदेशक जुबिन भरूचा की देखरेख में बल्लेबाजी में काफी सुधार किया है। वह कोविड-19 महामारी के दौरान महाराष्ट्र के तालेगांव स्थित भरूचा की अकादमी में अभ्यास करते थे।
न्यूजीलैंड सीरीज में स्पिनरों की मददगार पिच पर खेलने के बाद ऑस्ट्रेलिया की तेज और उछाल वाली पिचों से सामंजस्य बिठाने के लिए यशस्वी के पास काफी कम समय था। वह इस तैयारी के लिए दो दिनों तक अपने घर के निकट ठाणे स्टेडियम में रूके रहे और वहां थ्रो डाउन’ पर लगभग 200 ओवरों तक बल्लेबाजी अभ्यास किया। उन्होंने कंक्रीट के स्लैब को 45 डिग्री के कोण पर रख कर लगभग 145 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार वाली गेंदों पर अभ्यास किया। इस दौरान गेंदें को उनके शरीर के साथ ऑफ स्टंप को निशाना बना कर डाली गयी।
इंडियन प्रीमियर लीग की नीलामी के लिए जेद्दा में मौजूद भरूचा ने कहा, 'उनके पास समय कम था इसलिए उन्होंने ठाणे स्टेडियम में अभ्यास किया। उन्होंने अभ्यास में हलकी गेंदों का इस्तेमाल किया क्योंकि वह तेजी से निकलती है। कंक्रीट स्लैब को ‘गुथ लेंथ’ से थोड़ा पीछे रखा गया था। ऑस्ट्रेलिया रवाना होने से पहले उन्हें दो दिनों में लगभग 200 ओवरों तक बल्लेबाजी अभ्यास की।'
भरूचा से जब पूछा गया कि वह एक दिन में लगभग 100 ओवर तक बल्लेबाजी कैसे कर पाए तो उन्होंने कहा, 'अभ्यास के दौरान दो गेंदों के बीच में काफी कम समय था। गेंदें बिना रुके एक के बाद एक डाली जा रही थी ऐसे में हमने थोड़ा विश्राम करने के साथ लगभग ढाई घंटे में ऐसा कर लिया।' अतीत में ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण अफ्रीका दौरे से पहले भारतीय खिलाड़ी कंक्रीट की पिच पर 15 गज की दूरी से की जाने वाली गेंदबाजी का सामना करते थे, लेकिन समय के साथ इसमें काफी बदलाव आया है। उन्होंने कहा, 'सामान्य पिच जैसी उछाल टर्फ पिच पर हासिल करना मुश्किल है। इस लिए कंक्रीट स्लैब का इस्तेमाल ऐसे किया गया और उसे तरह से रखा गया जिससे अनियमित उछाल मिले। इस दौरान हमने सिंथेटिक गेंदों का प्रयोग किया था जो अधिक तेज गति से निकलती है।'