उधर, टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने चेपॉक की पिच को बेहद खराब घटिया बताया था। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि यह पिच टेस्ट क्रिकेट के लायक नहीं है। मांजरेकर का कहना था कि पहले दिन के 25-30 मिनट के खेल में ही पिच टूटनी नहीं चाहिए।
वहीं, अश्विन ने कहा था कि उन्हें इस पिच को लेकर कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने पूर्व क्रिकेटरों को जवाब देते हुए कहा था कि, अगर इस पिच को लेकर उनके पास कोई शिकायत है तो मुझे इसकी जानकारी नहीं है। खिलाड़ी जब इस तरह की परिस्थितियों का सामना करते हैं तो ऐसी चीजें स्वभाविक होती है। ईमानदारी से कहूं तो इस पिच पर सात दिन खेले हैं और इंग्लैंड ने हमें कड़ी टक्कर दी है।
अश्विन यहीं नहीं रुके,उन्होंने आगे कहा, 'तेज गेंदबाजों को मदद मिलने वाली पिचों पर खेलना ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। चाहे आप स्पिन अनुकूल या फिर तेज गेंदबाजों के अनुकूल पिचों पर खेलें, समय दर समय ये अधिक चुनौतीपूर्ण होगी। अगर गेंद 140-50 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से आती है तो इसे खेलना अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। आप अपना समय लीजिए और इसका सामना कीजिए।'