टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान का आज जन्मदिन है। जहीर ने अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कॅरियर में टीम इंडिया की की ओर से कुल 92 टेस्ट और 200 वनडे मैच खेले। इस दौरान उन्होंने टेस्ट में 311 और 200 वनडे मैचों में 282 विकेट हासिल किए। जहीर ने 17 अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैचों में 17 विकेट लिए। जहीर ने अपने करियर में सफलता के हर मुकाम को छुआ लेकिन भारत की ओर से सौ टेस्ट मैचों में नुमाइंदगी नहीं कर सके।
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जहीर खान
- फोटो : getty
महाराष्ट्र के अहमदनगर में जन्मे और श्रीरंगपुर के रहने वाले जहीर खान पढ़ लिखकर इंजीनियर बनना चाहते थे, लेकिन उनके पिता ने उनसे कहा कि बेटा देश में इंजीनियर तो बहुत हैं तुम तेज गेंदबाज ही बनो।
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जहीर खान
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इसके बाद जहीर मुंबई आ गए और मुंबई में जूनियर क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया। उनकी प्रतिभा को सबसे पहले एमआरएफ पेस फाउंडेशन के टीए शेखर ने पहचाना। उन्होंने जहीर को चेन्नई बुलाया। इसके बाद उनके करियर को पर लग गए। जहीर ने इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। शेखर ने उनकी गेंदबाजी को निखारा। करियर में जब कभी जहीर को उनकी मदद की आवश्यकता हुई उन्होंने हमेशा उनकी मदद की।
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जहीर खान
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भारतीय क्रिकेट टीम में न जाने कितने तेज़ गेंदबाज आए और गए, लेकिन उनमें से बहुत कम ही ऐसे हैं जिन्होंने लंबे समय तक देश की सेवा की और विश्व स्तर देश के साथ-साथ अपना नाम भी रोशन किया। यदि कपिल देव भारत के दाएं हाथ के सर्वकालिक महानतम तेज गेंदबाज हैं तो जहीर बाएं हाथ के। जहीर ने उस दौर में भारतीय गेंदबाजी की कमान थामी जब टीम में तेज गेंदबाजों के अंदर-बाहर जाने का दौर चल रहा था।
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जहीर खान
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जहीर को यह मालूम होता था कि सामने खड़े बल्लेबाज को किस तरह आउट किया जा सकता है। यह कला हर किसी में नहीं होती है इसके लिए आपका तकनीकी तौर पर दक्ष होना जरूरी है। जहीर को यह बहुत अच्छे से मालूम थी कि किस बल्लेबाज को किस जगह गेंद फेंकनी है, उदाहरण के लिए जहीर ने दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज ग्रीम स्मिथ को 27 भिडंत में 14 बार पैवेलियन वापस लौटाया।
ज़हीर कप्तान के गेंदबाज थे। जब कभी कप्तान परेशानी में होते तो गेंद जहीर के हाथों में थमा देते। जहीर ने भी अपने कप्तान को कभी निराश नहीं किया, उनकी ओवर द विकेट से फेंकी स्विंग होकर अंदर आती यॉर्कर गेंदें बेहद खतरनाक थीं. वह रिवर्स स्विंग की कला मे माहिर थे अपनी इस कला से वह अपने दौर के दिग्गज बल्लेबाज़ों को पिच पर छकाने में कामयाब रहे लेकिन चोटों ने उनके अंतर्राष्ट्रीय करियर को समय से पहले खत्म कर दिया।