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पाकिस्तान में क्यों डरकर पवेलियन भाग जाना चाहते थे सचिन

Wed, 16 Nov 2016 03:54 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
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सचिन तेंदुलकर
सचिन तेंदुलकर ने 15 नवंबर 1989 को अपना पहला टेस्ट मैच पाकिस्तान के खिलाफ कराची में खेला था। उस वक्त भारत पाकिस्तान के बीच के सियासी संबंधों का दबाव उनके ऊपर नहीं था। वह सिर्फ अपने पहले दौरे पर गए थे। सचिन को लग रहा था कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव देने के लिए टीम में जगह दी गई है लेकिन वह अंतिम 11 में शामिल हो पाएंगे इसकी संभावना उन्हें भी बेहद कम नजर आ रही थी। 
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पाकिस्तान में क्यों डरकर पवेलियन भाग जाना चाहते थे सचिन

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सचिन तेंदुलकर
पहले टेस्ट से पहले पाकिस्तान  11 के खिलाफ रावलपिंडी में खेले गए एक अभ्यास मैच में सचिन ने  47 रन की पारी खेली थी। उस छोटी सी पारी के लिए पाकिस्तानी दर्शकों ने सचिन को स्टैंडिंग ओवेशन दिया। इसके बाद 15 नवंबर से शुरु होने वाले पहले टेस्ट की पहले शाम को सचिन को खबर मिली की उन्हें कप्तान के श्रीकांत ने अंतिम 11 में शामिल कर लिया है। सचिन ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि मेरे लिए उस पल को बयां कर पाना बेहद मुश्किल है। 

 
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वकार यूनुस - फोटो : ANI
सचिन का पदार्पण मैच कपिल देव के करियर का सौवां टेस्ट मैच भी था। वहीं तेज गेंदबाज सलिल अंकोला और पाकिस्तान के महानतम तेज गेंदबाजों में से एक वकार यूनिस का भी यह पहला टेस्ट मैच था। 

 

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कपिल देव - फोटो : getty
सचिन के टेस्ट करियर का पहला दिन भी बेहद नाटकीय था। पहले दिन लंच के बाद एक दर्शक मैदान में घुस आया और सीधे कपिल देव के पास पहुंचर उन्हें पाकिस्तान खेलने आने के लिए गालियां दीं। इसके बाद वह मनोज प्रभाकर और कप्तान श्रीकांत के पास पहुंचा और उन्हें भी गालियां दीं। इसके बाद सचिन इस बात से डर गए। सचिन मन ही मन इस बात के लिए तैयार थे कि यदि वह व्यक्ति उनकी तरफ आया तो ड्रेसिंग रूम की तरफ भागने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।  इस दौरान कोई भी सुरक्षा कर्मी उस व्यक्ति को रोकने मैदान पर नहीं आया। इसके बाद जब कप्तान श्रीकांत की उसके साथ हाथापाई हुई तब सुरक्षाकर्मी उसे मैदान बाहर ले गए। इस घटना के बाद सचिन को अहसास हुआ कि भारत-पाकिस्तान के बीच का यह मैच क्रिकेट के अलावा बहुत कुछ है। 

 
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सचिन तेंदुलकर
सचिन पहले दिन फील्डिंग करने के बाद इतना थक गए थे कि वह होटल में पहुंचते ही बगैर चाय पिए सो गए। वह रात में उठे खाना खाया और फिर सोने चले गए। दूसरे दिन पाकिस्तान 409 रन बनाकर ऑल आउट हो गई और भारत की बैटिंग आई। पिच में बहुत घास थी और भारत की अच्छी शुरुआत नहीं थी। भारत ने 41 रन पर अपने 4 विकेट गंवा दिए थे। वसीम अकरम और वकार यूनिस अपनी तूफानी गेंदबाजी से कहर ढा रहे थे। ऐसे में सचिन 6वें नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरे। 
 
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वसीम अकरम - फोटो : Getty
सचिन का टेस्ट क्रिकेट में वसीम अकरम ने बाउंसर्स से स्वागत किया था। पहली बाउंसर झेलने के बाद सचिन को यकीन था कि वसीम अगली गेंद यॉर्कर ही डालेंगे। इस बात के लिए सचिन पूरी तरह तैयार थे। लकिन उन्होंने दोबारा बाउंसर डाल दी। अगली दोनों गेंदें भी बाउंसर आईं। जब ओवर खत्म हुआ तो सचिन ने खुद से कहा ' वेलकम टू टेस्ट क्रिकेट'। बिना किसी संदेह के सचिन को इस बात का अहसास हो गया कि टेस्ट मैच खेलना सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण है।
 
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imran khan
इमरान खान ने कहा जैसे ही सचिन बैटिंग करने आया मैंने सोचा ये बच्चा आ गया है इतना सा ये क्या खेलेगा। एक तो कद छोटा,  ऊपर से उमर छोटी। तब वकार यूनिस और वसीम अकरम अपने चरम पर थे। जब सचिन बल्लेबाजी के लिए मैदान पर आए तब वसीम और  वकार गेंदबाजी कर रहे थे। वह वकार यूनिस का भी पहला टेस्ट था। उस वक्त इमरान मिड ऑफ पर खड़े थे। उन्होंने मुझसे कहा इस लड़के के बारे में बहुत सुना है इसे रन नहीं बनाने देते हैं। इमरान को लगा कि  इसके पहले सचिन ने कभी इतनी तेज गेंदबाजी का सामना नहीं किया होगा। सचिन के लिए उन्होंने  चार स्लिप और गली में एक फील्डर खड़ा कर दिया।

 

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Sachin Tendulkar
सचिन खुद मानते हैं कि उन्होंने इससे पहले कभी भी इतनी तेज गेंदबाजी का सामना नहीं किया था। वह बल्लेबाजी करते वक्त खुद से बात कर रहे थे और पूछ रहे थे क्या वह इस तरह की गेंदबाजी का सामना करने के लिए तैयार है। क्योंकि गेंद तक पहुंचने से पहले गेंद निकल चुकी होती थी। वह अपनी पहली टेस्ट पारी में केवल 24 गेंदों का सामना कर सके। जिनमें से आधी से ज्यादा गेंदों की उन्हें भनक तक नहीं लग पाई थी। इस दौरान सचिन दो चौके भी लगाए जिसके बाद उन्हें थोड़ा अच्छा महसूस किया लेकिन ये अच्छे पल क्षणिक थे। सचिन केवल 15 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। 

 
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चंदू बोर्डे
पहला टेस्ट ड्रॉ रहा। सचिन  को दूसरी पारी में खेलने का मौका नहीं मिला। लेकिन इस टेस्ट के बाद सचिन को अपनी क्षमता पर संदेह होने लगा था कि क्या वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए तैयार हैं। इसके बाद सचिन ने तात्कालिक कोच चंदू बोर्डे और रवि शास्त्री ने उन्हें सलाह दी कि पहले 15 से 20 मिनट पिच पर संयम से गुजारो ये पल बेहद अहम होते हैं। इसके बाद सब कुछ आसान हो जाता है। 




 
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