फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमांशु सांगवान: टिकट कलेक्टर से क्रिकेटर बने इस खिलाड़ी की क्यों हो रही धोनी से तुलना?

Sat, 04 Jan 2020 08:51 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
हिमांशु सांगवान - फोटो : ट्विटर
विज्ञापन

कंधे तक लंबे बालों वाले महेंद्र सिंह धोनी के डेब्यू मैच को देखकर किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन छोटे शहर से आया यह खिलाड़ी टीम इंडिया का सफलतम कप्तान बन जाएगा। अपनी अगुवाई में टीम इंडिया को दो-दो विश्व कप दिलाएगा, लेकिन अपने मेहनत और लगन के बूते माही ने साबित कर दिया कि चाहो तो सबकुछ है आसान। विपरित हालातों में भी मुस्कुराना, कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखना धोनी की पहचान बन गई। तनाव को चेहरे तक न आने देना, टीम बिल्डिंग, एकजुटता ऐसे कई गुण हैं, जो हर शख्स अपने जीवन में उतारना चाहता हैं। देश के सुदूर कोने में गेंद-बल्ला थामने वाले हर क्रिकेटर ने रांची के इस राजकुमार को अपना आदर्श माना। सौरभ तिवारी, ईशान किशन जैसे कई होनहारों ने धोनी के बाद इस खेल में झारखंड का नाम रौशन किया, लेकिन अब हरियाणा के एक पेसर हिमांशु सांगवान की धोनी से तुलना हो रही है।

विज्ञापन

हिमांशु भी धोनी की ही तरह टिकट कलेक्टर

हिमांशु सांगवान - फोटो : ट्विटर
संघर्ष के दिनों में एमएस धोनी रेलवे में बतौर टिकट कलेक्टर काम करते थे। काम और अपने पैशन के बीच किस तरह सामंजस्य बिठाया जाता है धोनी ने यह बखूबी बताया। अब टीम इंडिया के दरवाजे पर दस्तक देने की कोशिशों में अब एक और भी ऐसा खिलाड़ी जुटा है जो धोनी की ही तरह टिकट कलेक्टर का काम कर चुका है। हरियाणा के पेसर हिमांशु सांगवान का नाम इस रणजी ट्रॉफी सत्र से पहले शायद ही किसी ने सुना होगा, लेकिन मुंबई के वानखेडे स्टेडियम पर अपनी कहर बरपाती गेंदों से हिमांशु ने आज हमें उनके बारे में लिखने को मजबूर कर दिया।

41 बार की चैंपियन मुंबई को पटकने में हिमांशु ने अहम भूमिका निभाई। यह पहला मौका था जब रेलवे ने मुंबई को रणजी ट्रॉफी में मात दी। मैच में 24 साल के हिमांशु सांगवान ने छह विकेट लिए। अपनी तेज गेंदबाजी से टीम इंडिया के टेस्ट उपकप्तान अजिंक्य रहाणे और पृथ्वी शॉ जैसे खिलाड़ियों को निपटाने वाले सांगवान नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर टिकट कलेक्टर का काम कर चुके हैं। मैच में रेलवे ने मुंबई को पहली पारी में 114 रन पर समेटा और दूसरी पारी में 198 रन निपटा दिया और आठ विकेट से अपने नाम किया।

सात मैच में चटकाए 37 विकेट

हिमांशु सांंगवान - फोटो : ट्विटर
हिमांशु सांगवान का यह पहला रणजी सत्र है। 2019 में ही उन्होंने अपना फर्स्ट क्लास, लिस्ट ए और टी-20 (सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी) डेब्यू किया। मुंबई से पहले यूपी के खिलाफ भी उन्होंने चार विकेट लेकर बवाल किया था। सौराष्ट्र के खिलाफ भी दो विकेट लिए। मगर दिलचस्प बात है कि रणजी ट्रॉफी में आगाज करने से पहले हिमांशु सांगवान ने सीके नायडू ट्रॉफी के 7 मैचों में 37 विकेट हासिल किए थे। इसी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें रणजी ट्रॉफी टीम में चुना गया।

रहाणे और पृथ्वी शॉ को ऐसे फंसाया जाल में

मुंबई के खिलाफ दूसरी पारी में पंजा मारने वाले हिमांशु सांगवान ने अजिंक्य रहाणे और पृथ्वी शॉ जैसे दिग्गजों को ढेर किया। मैच के बाद सांगवान ने कहा, 'टीम मीटिंग में कोच ने कहा था कि अंडरडॉग नहीं हैं। चाहे रहाणे हों या शॉ, हमें सही दिशा में गेंद फेंकनी होगी और हमने ऐसा ही किया। मैं जानता था कि पृथ्वी शॉ आक्रामक खिलाड़ी है, इसलिए मैंने अपनी पूरी विविधता के साथ गेंदबाजी करने की कोशिश की। गति परिवर्तन किया। लेंग भी बदली, जिसका फायदा भी मिला। वहीं रहाणे जब क्रीज पर आए तो हम जानते थे कि वे दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक हैं, मैंने उन्हें ऑफ स्टंप के बाहर खिलाने की कोशिश की और हमारी प्लान सफल रहा।'
विज्ञापन

महान ऑस्ट्रेलियाई पेसर ग्लेन मैक्ग्रा ने तराशा

ग्लेन मैक्ग्रा के साथ हिमांशु सांगवान - फोटो : ट्विटर
हिमांशु सांगवाल ने एक अंग्रेजी समाचार समूह से बातचीत करते हुए कहा कि, 'मैंने गेंदबाजी के गुर ऑस्ट्रेलिया के महान तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा से सीखें। मैंने ग्लेन मैक्ग्रा से प्रेरणा ली। वह मेरे आदर्श हैं। मैंने मार्च 2019 में MRF पेस फाउंडेशन से उनसे मुलाकात की। मैक्ग्रा मेरी गेंदबाजी के वीडियो देखते थे और मुझे बताते थे कि मुझे किन क्षेत्रों में सुधार करने की जरूरत है। वह महान खिलाड़ी हैं। उनसे मैंने सीखा कि कैसे हर हालात में बेसिक्स पर टिके रहना हैं।' सांगवान की माने तो मैक्ग्रा की सलाह से ही उन्हें रणजी ट्रॉफी में फायदा हुआ।

हालांकि सिर्फ टिकट कलेक्टर होने से ही हिमांशु सांगवान के साथ महेंद्र सिंह धोनी की तुलना करना बेईमानी होगी। हिमांशु नए दौर के खिलाड़ी हैं। जिस जज्बे के साथ उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की है अगर उसी रास्ते पर चलते जाए तो उन्हें टीम इंडिया में एंट्री करने से कोई नहीं रोक सकता। अगर हरियाणा के इस खिलाड़ी को 'रांची के राजकुमार' की तरह टीम इंडिया का दरवाजा ठकठकाना है तो सिर्फ एक काम करना होगा और वह है बिना थमे-थके मेहनत और अपने काम से इश्क...
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें