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Birthday Special: इस क्रिकेटर और सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट की तस्वीर बदल दी

Sun, 30 Oct 2016 12:34 AM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
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मैथ्यू हेडन - फोटो : getty
टेस्ट मैच क्रिकेट का सबसे लंबा और चुनौतीपूर्ण स्वरूप है लेकिन कुछ खिलाड़ियों ने मिलकर क्रिकेट के सबसे पुराने फॉर्मेट की रूपरेखा ही बदल दी। ऐसे खिलाड़ियों को याद करते रहना लाजिमी है। ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज मैथ्यू हेडेन। जिन्हें टेस्ट क्रिकेट के सबसे विध्वंसक बल्लेबाजों में शुमार किया जाता है। 29 अक्टूबर 1971 को ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में जन्मा यह खिलाड़ी आज 45 वर्ष का हो गया है। 
 
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हेडन - फोटो : getty
हाल ही में भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने कहा था कि हेडेन और वीरेंद्र सहवाग ने मिलकर टेस्ट क्रिकेट की तस्वीर बदल दी। आप आज के दौर से सलामी बल्लेबाजों को देखिए, उन्हें तेजी से रन न बनाने के कारण आलोचना झेलनी पड़ती है। यह सब वीरेन्द्र सहवाग और मैथ्यू हेडन ने शुरू किया। टेस्ट में इन दोनों ने बल्लेबाजी की परिभाषा बदल दी।

 
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हेडन - फोटो : getty
मार्च 1994 को जोहान्सबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हेडन ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की। हेडन शुरू में माइकल स्लेटर के जोड़ीदार रहे, लेकिन मार्क टेलर के कप्तान बनने के बाद वे उनके साथ पारी शुरू  करने लगे।  चौदह साल लंबे क्रिकेट करियर में हेडेन ने ऑस्ट्रेलिया के लिए एक बेहतरीन ओपनर की भूमिका निभाई। उन्होंने टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में माइकल स्लेटर, मार्क टेलर, जस्टिन लेंगर, एडम गिलक्रिस्ट, मार्क वॉ और फिल जैक्स के साथ ऑस्ट्रेलियाई पारी का आगाज किया। इनमें लंबे समय तक उनके जोड़ीदार लेंगर रहे। हेडन-लेंगर की जोड़ी ने कई टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलिया को जबरदस्त शुरुआत दी और उन मैचों में जीत के शिल्पकार बने।
  

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हेडन - फोटो : getty
साल 2003 में पर्थ टेस्ट में हेडन ने जिम्बॉब्वे के खिलाफ 380 रनों की पारी खेलकर विश्व कीर्तिमान बनाया था। हालांकि यह कीर्तिमान ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सका और ब्रायन लारा ने एक बार फिर 400 रनों की पारी खेलकर इस रिकॉर्ड को अपने नाम कर लिया। लेकिन हेडन की इस पारी की खासियत यह थी कि उन्होंने ये 380 रन 90 की स्ट्राइक रेट से बनाए थे।  
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हेडन - फोटो : getty
संन्यास लेने से पहले हेडेन खराब फॉर्म से गुजर रहे थे। यह पहली बार नहीं था, जब हेडेन ने अपनी लय खोई। वे पहले भी दो बार टीम से खराब फॉर्म की वजह से बाहर हो चुके थे। 1994 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करने वाले हेडन शुरू में कुछ खास नहीं कर पाए और उन्हें टीम से अपना स्थान गंवाना पड़ा। 1996 में हेडेन की टीम में वापसी हुई और सामान्य प्रदर्शन के दम पर एक साल तक टीम में बने रहे।  इसके बाद 1997 में उन्हें टीम से बाहर जाना पड़ा और तीन साल तक उनकी टीम में वापसी नहीं हुई। इस दौरान उन्होंने कड़ी मेहनत की और 31  मार्च 2000 को न्यूजीलैंड के खिलाफ हेमिल्टन टेस्ट में उनकी टेस्ट टीम में वापसी हुई।   
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हेडन - फोटो : getty
इसके बाद वे हेडेन प्रदर्शन के आधार पर कभी टीम से बाहर नहीं हुए। कुछ मौकों पर वे चोटिल होकर बेंच पर बैठे, लेकिन जल्द ही वापस भी आए।  हेडेन की मौजूदगी से सालों-साल ऑस्ट्रेलियाई टीम मैनेजेमेंट को सलामी बल्लेबाजी को लेकर अलग से कोई योजना नहीं बनानी पड़ी। जिस वक्त हेडन ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया तब भी चयनकर्ता उन्हें एशेज सीरीज के लिए टीम में चुनना चाहते थे। लेकिन हेडेन ने अपने परिवार और मित्रों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद उन्होंने अपने संन्यास की घोषणा कर दी।
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हेडन - फोटो : getty
हेडेन ने करियर में103 टेस्ट मैचों में 30 शतक और 29 अर्धशतक के साथ 50.73 की औसत से 8625 रन बनाए। टेस्ट में उनका स्ट्राइक रेट 60.10 रहा। कई विशेषज्ञ उन्हें अब तक का सर्वश्रेष्ठ ऑस्ट्रेलियाई ओपनर मानते हैं। हेडेन के सबसे पसंदीदा टीम भारत थी। भारत के खिलाफ हेडेन ने 18 टेस्ट की 35 पारियों में 59 की औसत से 1888 रन बनाए। उनके करियर का दूसरा सर्वाधिक स्कोर(203) भारत के ही खिलाफ है। भारत के खिलाफ हेडेन ने 6 शतक और 6 अर्धशतक लगाए। साल 2001 का भारत दौरा हेडेन के करियर का अहम मोड़ साबित हुआ। इस सीरीज में उन्होंने 549 रन बनाए थे। उन्होंने भारतीय स्पिनरों को इस सीरीज में जमकर निशाना बनाया था। वह इस सीरीज में स्पिनरों के खिलाफ इतने कारगर थे कि ऑफ स्टंप से बाहर की गेंदों को भी स्वीप कर देते थे। 

 
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हेडन - फोटो : getty
हेडेन ने करियर में 161 वनडे मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 43.80 की औसत से 6133 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 78.96 का था। हेडेन 2003 और 2007 में विश्वकप जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम के सदस्य भी थे। साल 2007 में वेस्टइंडीज में आयोजित विश्वकप में वह सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज थे। वनडे में भी उनकी फेवरेट टीम इंडिया थी। वन डे में भारत के खिलाफ 28 मैचों में 53.70 की औसत से 1450 रन बनाए। इस दौरान 3 शतक और 10 अर्धशतक भी जड़े जो किसी भी टीम के खिलाफ सबसे ज्यादा हैं।
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