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यो-यो के बाद BCCI लाया नया फिटनेस टेस्ट जानिए क्यों ?

Mon, 13 Nov 2017 06:07 AM IST
amarujala.com- Presented by: नवीन चौहान
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यो यो टेस्ट - फोटो : economics times
बीसीसीआई ने खिलाड़ियों की फिटनेस के मद्देनजर एक बड़ा फैसला लेते हुए यो-यो टेस्ट के बाद एक और टेस्ट जरूरी कर दिया है। बीसीसीआई द्वारा लागू किए गए इस डीएनए फिटनेस टेस्ट के जरिए खिलाड़ियों के व्यक्तिगत फिटनेस ब्लूप्रिंट के बारे में निर्णय लिया जा सकेगा। बीसीसीआई ने ये निर्णय कप्तान विराट कोहली के फिटनेस के मामले में किसी तरह का समझौता न करने की प्रवृत्ति को देखकर लिया गया है। 

 
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यो-यो के बाद BCCI लाया नया फिटनेस टेस्ट जानिए क्यों ?

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टीम इंडिया - फोटो : self
इस परीक्षण से खिलाड़ी को अपनी रफ्तार को बढ़ाने, मोटापा कम करने, दमखम बढ़ाने और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। ऐसा लगता है कि भारतीय बोर्ड कप्तान विराट कोहली के फिटनेस के मंत्र को फॉलो करने की कोशिश कर रहा है। साथ ही खिलाड़ियों और क्रिकेटरों के लिए नए मापदंड स्थापित कर रहा है। 

 
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भारतीय क्रिकेट टीम - फोटो : BCCI
डीएनए टेस्ट से इस बात की जानकारी देता है कि 40 से अधिक जीन्स किस तरह व्यक्ति की फिटनेस, स्वास्थ्य और न्यूट्रीशन को प्रभावित करते हैं। इसके बाद प्रत्येक क्रिकेटर का इंडीविजुअल एनालिसिस उसके डीएनए और पर्यावरण यानी उसके वजन और डाइट के आधार पर किया जाएगा।  बीसीसीआई ने ये टेस्ट टीम के प्रशिक्षक शंकर बासु की अनुशंसाओं के आधार पर करने का निर्णय लिया है। बीसीसीआई के अधिकारी ने इस बारे में बताया कि हम कुछ दिनों से टीम के खिलाड़ियो का फिटनेस के लिए डीएनए टेस्ट कर रहे हैं। ऐसा खिलाड़ियों की फिटनेस को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए किया जा रहा है। 

 

यो-यो के बाद BCCI लाया नया फिटनेस टेस्ट जानिए क्यों ?

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टीम इंडिया - फोटो : dd news
पहली बार खिलाड़ियों की फिटनेस के लिए डीएनए टेस्ट का उपयोग एनबीए बास्केटबॉल में अमेरिका में किया गया था। यह वहां खिलाड़ियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ था। सभी खिलाड़ियों के इस टेस्ट के लिए बीसीसीआई ने 25 से 30 हजार रुपये खर्च किए हैं। 





 
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यो-यो के बाद BCCI लाया नया फिटनेस टेस्ट जानिए क्यों ?

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टीम इंडिया - फोटो : ESPN
पहले खिलाड़ियों की फिटनेस की जांच के लिए स्किनफोल्ड टेस्ट किया जाता था। इसके बाद इसके लिए डेक्सा(DEXA) टेस्ट किया जाने लगा। स्किनफोल्ट टेस्ट को बहुत दिनों तक टीम इंडिया ने फॉलो किया लेकिन उस टेस्ट के बॉडी फैट परसेंटेज का माप सही नहीं था। इसके बाद बॉडी फैट के सही आकलन के लिए डेक्सा टेस्ट किया जाने लगा। लेकिन अब डीएनए टेस्ट की ओर रुख इसलिए किया गया है ताकि शरीर में निश्चित मात्रा में फैट प्रतिशत बनाए रखने के लिए शरीर को किन चीजों की आवश्यकता है। 

 
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यो-यो के बाद BCCI लाया नया फिटनेस टेस्ट जानिए क्यों ?

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टीम इंडिया - फोटो : twitter
एक अधिकारी ने कुछ खिलाड़ियों के नियमित ट्रेनिंग करने के बावजूद शरीर से एक्सट्रा फैट कम करने में सफल न होने का कारण बताते हुए कहा कि कुछ खिलाड़ियों ने बचपन से ये मानते हुए नियमित तौर पर दूध का सेवन किया कि ऐसा करने से शरीर मजबूत होता है और ताकत आती है। लेकिन अब उन्हें पता चला है कि उनके शरीर में फैट प्रतिशत ठीक नहीं है। पर्याप्त मात्रा में ट्रेनिंग करने के बावजूद वो सही मात्रा में संतुलन नहीं बना पा रहे हैं। जिसकी आज के खेल के लिए आवश्यकता है। 

 
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