हाथियों के इस झुंड में दो छोटे बच्चे थे और पूरा झुंड कमल के फूल जैसी (lotus formation) संरचना में बच्चों को छुपाकर आगे बढ़ रहा था।
- फोटो : अमर उजाला: ब्रजेश सिंह
अचानक ड्राइवर ने चिल्लाते हुए हम सबको आगाह किया की आस-पास हाथियों के आने की आवाज आ रही है और उसे गाड़ी को हटाना है, हमारे साथ एक नए- नवेले फोटोग्राफर महोदय थे और दुर्भाग्य से वह तेंदुए की मनपसंद’ तस्वीर नहीं ले पाए थे, उनकी जिद के कारण गाड़ी आगे नहीं बढ़ पाई और तब तक हम लगभग 20-15 हाथियों के झुंड से घिर चुके थे।
हाथियों के इस झुंड में दो छोटे बच्चे थे और पूरा झुंड कमल के फूल जैसी संरचना में बच्चों को छुपाकर आगे बढ़ रहा था। ड्राइवर ने जैसे ही गाड़ी रिवर्स करने की कोशिश की, वो जोर की आवाज के साथ एक पेड़ से जा टकराई। आगे पीछे करने की कोशिश में गाड़ी कीचड़ में फंसी ही थी कि एक तेज झटके से पूरी गाड़ी हिल गई, ये एक बुल था और निश्चित ही हमारी गाड़ी के शोर ने उसे भड़का दिया था।
मैंने देखा कि बाईं तरफ से एक और हाथी दौड़ता हुआ हमारी तरफ आया और गाड़ी में जोर से धक्का दिया, हम सब चीख रहे थे और हमारी स्थिति सैंडविच जैसी थी, पीछे पेड़, दोनों तरफ हाथी और सामने पूरा झुंड, ये तो हमारे ड्राइवर का बुद्धिकौशल था कि उन्होंने मौक़ा और जगह देखते हुए गाड़ी को निकाला और दूर ले आए, हम सब सुरक्षित थे लेकिन सबके चेहरों पर सफेदी थी और ये घटना आज भी जहन में आती है तो रोंगटे खड़े कर देती है।
लेखक ब्रजेश सिंह, वन्यजीव फोटोग्राफर हैैं।
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