इरफान खान ने नेेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से 'ड्रामेटिक आर्ट' का कोर्स किया था।
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इरफान खान ने भी ' हासिल ' फिल्म में स्टूडेंट डॉन की बड़ी ही सशक्त भूमिका निभाई है। फिल्म 'पानसिंह तोमर' में इरफान ने चंबल के डाकू पानसिंह तोमर की भूमिका ऐसी निभाई है, जैसे वर्षों से इस जीवन के जीने के आदी हों।
तो कहने का मतलब ये कलाकार जिनसे हममें से ज्यादातर लोग शायद कभी मिले नहीं होते हैं पर अपनी भूमिका अपने अभिनय के जरिए हम सबसे ऐसे जुड़े होते हैं जैसे उनके साथ रोज का उठन - बैठना होता हो।
कई बार लोग उनकी तरह उठना- बैठना, वेशभूषा, बोलचाल आदि अन्य आदतों को अपने जीवन में उतार लेते हैं, इसलिए ये कलाकार हमारे जीवन में इतनी अहमियत रखते हैं। मनोविज्ञान की भाषा में इसे ''रोल आइडेंटिफिकेशन' कहते हैं।
ये मनोरंजन के साथ-साथ हमें मानसिक रूप से तनाव, निराशा, मानसिक दबाव आदि से मुक्त कराते हैं। अब हम इन कलाकारों के जीवन पर संक्षिप्त प्रकाश डालेंगे। 7 जनवरी 1967 को इरफान खान का जन्म जयपुर शहर में हुआ था। इन्होंने हिन्दी सिनेमा के अलावा ब्रिटिश और अमेरिकन फिल्मों में भी काम किया था। 1985-2020 तक करीब 30 वर्षों तक उन्होंने फिल्म जगत में काम किया।
उनकी असाधारण अभिनय क्षमता ने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर कई सम्मान दिलाए और उनके चाहने वालों के दिल में हमेशा के लिए एक उच्चतम श्रेणी के कलाकार के रूप में जगह बना ली। उन्हें 2011 में पद्मश्री, नैशनल फिल्म अवार्ड तथा चार फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
उनकी कुछ मशहूर फिल्में दि लंच बॉक्स, पीकू, पानसिंह तोमर, सलाम बॉम्बे, स्लम डॉग मिलेनियर, हैदर, तलवार, हिंदी मिडियम आदि थी। इन्होंने कई टीवी सीरियल में भी काम किया। फिल्म ' हासिल ' के बाद इनके करियर में उछाल आई और ' अंग्रेजी मिडियम ' इनकी आखिरी फिल्म थी।
इरफान कहते थे कि शुरू में कोई भी कलाकार नाम और शोहरत के पीछे भागता है पर कुछ अनुभव होने के बाद उसे समझ में आता है कि उसका वास्तविक सपना कुछ और है। वह कला की गहराई में उतरने लगता है।
उन्होंने नेेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से 'ड्रामेटिक आर्ट' का कोर्स किया था। ऐसा लगता है मानों इनकी तरक्की, योजनाओं, सपनों, आकांक्षाओं को ग्रहण लगा गया हो। सिर्फ 53 वर्ष की उम्र में 'न्यूरोइंडोक्राइन कैंसर ' की वजह से इनकी मृत्यु हो गई।
ऋषि कपूर बहुप्रतिभा के धनी कलाकार थे।
- फोटो : फाइल फोटो
अभिनेता ऋषि कपूर का जन्म 4 सितंबर 1952 को हिन्दी सिनेमा जगत के सबसे प्रभावशाली परिवार ' कपूर परिवार ' में हुआ था। वे मशहूर अभिनेता राज कपूर साहब के द्वितीय पुत्र और पृथ्वीराज कपूर के पौत्र थे। वे एक मस्त स्वभाव के व्यक्ति थे।
परिवार, दोस्त और अच्छा खाना उनकी प्राथमिकता थी। वे बहुप्रतिभा के धनी कलाकार थे। वे फिल्म इंडस्ट्री और देश के विकास के लिए हमेशा चिंतित रहते थे। वे एक अभिनेता, डाइरेक्टर और प्रोड्यूसर थे।
1970 में ' मेरा नाम जोकर ' में बाल कलाकार का रोल किया था और उन्हें नैशनल फिल्म अवॉर्ड से नवाजा गया था। 1973 से 2000 तक उन्होंने 92 फिल्मों में काम किया। 1973 में उनकी प्रतिष्ठित फिल्म ' बॉबी ' आई थी, उसमें उन्होंने डिंपल कपाड़िया के साथ काम किया।
इसके लिए उन्हें फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था। इन्हें 2008 में लाइफ टाइम एचिवमेंट अवॉर्ड मिला था। अमर अकबर एंथनी, लैला-मजनू, रफूचक्कर, कर्ज, सरगम, दो-दूनी चार आदि इनकी मशहूर फिल्में थींं।
1980 में इनकी शादी मशहूर अभिनेत्री नीतू सिंह से हुई। इनके एक पुत्र अभिनेता रणबीर कपूर है और इनकी बेटी रिद्धिमा कपूर साहनी है। ये एक जिंदादिल इंसान थे। वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्हें आप हमेशा मुस्कुराहट के साथ ही याद करेंगे। इनकी मृत्यु भी ब्लड कैंसर से सिर्फ 67 वर्ष की उम्र में हो गई।
लगता है दोनों कलाकारों ने एक साथ मन बना लिया था कि इस पीड़ादायक बीमारी की गुलामी और नहीं सहनी है और 'चल कहीं दूर निकल जाएं' कहकर अपने को आजाद कर लिया। हम सभी भारतवासी इन दोनों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजली देते हैं और इस भारत भूमि पर पुनर्जन्म लेने के आह्वान के साथ ईश्वर से इनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हैं।
इन दोनों के लिए ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि -
ना बुढ़ापा आया और ना जवानी खत्म हुई।
इक दर्द भरे मोड़ पे इनकी कहानी खत्म हुई ।
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