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किस्सा ट्विटर का: "क से कबूतर" (ट्विटर), "क से कू", "क से कॉरपोरेट" (एलन मस्क) और "क से कलम"

सार

ट्विटर सौदे के बाद फिर से बहस छिड़ गई है। मीठी-मीठी बातों की जगह महज एक संदेश से कड़वाहट घुल जाने का खतरा बना रहता है। हाल के वर्षों में सामाजिक ताना-बाना को लेकर ट्विटर की भूमिका सवालों के घेरे में रही है। किसान आंदोलन के दौरान ट्विटर के जरिये टूल किट का मामला हो या लोनी में धर्म विशेष के बुजुर्ग की पिटाई का, एक-एक ट्वीट से भूचाल खड़ा हुआ। सरकार और ट्विटर के बीच इन ट्वीट्स पर 36 का रिश्ता बना।

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हाल के वर्षों में सामाजिक ताना-बाना को लेकर ट्विटर की भूमिका सवालों के घेरे में रही है। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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क से कबूतर (ट्विटर), क से कू, क से कॉरपोरेट (एलन मस्क), क से कलम यानी सोशल मीडिया के एक बड़े प्लेटफॉर्म पर बदलाव की बयार। जी हां, ट्विटर सौदे के बाद सोशल मीडिया पर अब बहस छिड़ गई है क्या इस प्लेटफॉर्म का रंग-ढंग बदलने जा रहा है।

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ट्विटर को और मजेदार बनाने वाले एलन मस्क के ट्वीट ने इस बहस को और बल प्रदान किया है। तटस्थता, निष्पक्षता और सामाजिक सरोकार को लेकर सोशल मीडिया से भी प्रिंट-डिजिटल मीडिया की मानिंद जिम्मेदारी की आस जगी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, व्हाट्सएप, यू ट्यूब चैनल्स से लेकर तेज रफ्तार संदेश पहुंचाने वाले ट्विटर, कू तक से सामाजिक दायित्व को लेकर समय-समय पर बहस छिड़ती रही है।
 

ट्विटर सौदे के बाद फिर से बहस छिड़ गई है। मीठी-मीठी बातों की जगह महज एक संदेश से कड़वाहट घुल जाने का खतरा बना रहता है। यह सही है कि इसके लिए इन कंपनियों से ज्यादा हम लाखों-करोड़ो यूजर्स जिम्मेदार हैं, जो अपने हितों के लिए इन प्लेटफॉर्म का बेजा इस्तेमाल करने से बाज नहीं आते हैं।

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कंपनियां भी जहर घोलने वाले ट्वीट-रि ट्वीट के चक्कर में इन पर न कोई लगाम लगा पाती है और न कोई आचार संहिता तय करती हैं, क्योंकि रिश्ता मुनाफे से जुड़ जाता है। आलम यह है कि वायरल होने वाले वीडियो का वायरल सच दिखाने वाले टीवी चैनल्स को भी सरकार की ओर से नसीहत दी जाने लगी है कि वे खली-अली-बजरंगबली जैसे शीर्षकों से परहेज करें और समाज में खलबली न मचाएं।


कबूतर (ट्विटर) के मुकाबले कोयल (कू)

दरअसल, हाल के वर्षों में सामाजिक ताना-बाना को लेकर ट्विटर की भूमिका सवालों के घेरे में रही है। किसान आंदोलन के दौरान ट्विटर के जरिये टूल किट का मामला हो या लोनी में धर्म विशेष के बुजुर्ग की पिटाई का, एक-एक ट्वीट से भूचाल खड़ा हुआ। सरकार और ट्विटर के बीच इन ट्वीट्स पर 36 का रिश्ता बना।

दोनों के बीच तलवारें खींची। एक अदद ट्वीट से टूल किट तक का मामला जनता, यूजर्स से कोर्ट-कचहरी तक पहुंचा। हैरानी की बात तो यह है कि यह सब अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर हुआ। और तो और ट्विटर के मुकाबले कू के जरिए कबूतर के माध्यम से परोसे जाने वाले नफरती संदेशों को कू की कोयल वाली मिठास से कम करने की कोशिशें भी हुई।

हालांकि, शुरू में तो भारत में कू को लेकर सरकार और मंत्री भी सजग दिखें लेकिन अब फिर से पीएम से लेकर मंत्री तक ट्वीट के जरिए ही जन-जन तक तेजी से अपना संदेश पहुंचाते दिख रहे हैं। स्वदेशी कू अपने ही देश में पिछड़ गया है। कोयल सी तेरी बोली (मीठी-मीठी बातों) में दिलचस्पी कम दिख रही है।

इसे भारत से ज्यादा नाइजीरिया ने आत्मसात किया है। परदे पर फिल्माए गए कबूतर जा जा.. और कोयल सी तेरी बोली...जैसे प्रेमगीत वास्तविक जीवन में प्रेम संदेशों को एक-दूसरे तक पहुंचाने के बजाय कटुता पैदा करने का टूल किट बनते जा रहे हैं।

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बहस छिड़ गई है कि ट्विटर अब बदल जाएगा। ट्विटर के इस्तेमाल का नजरिया बदल जाएगा। - फोटो : amarujala

फेक यूजर्स को लेकर सजगता

दुनिया में ट्विटर के यूजर्स भले 21 करोड़ हों, लेकिन भारत में करीब 2 करोड़ ट्विटर यूजर्स हैं। स्वतंत्र निवेशकों के बोर्ड वाले ट्विटर के एलन मस्क द्वारा खरीदने के बाद इस सोशल मीडिया प्लेटफार्म बड़े कॉरपोरेट के पास है। इस कॉरपोरेट सौदे को भी सोशल मीडिया पर गोदी मीडिया बनाम डिजाइनर मीडिया के चश्मे से ही देखा जा रहा है।

बहस छिड़ गई है कि ट्विटर अब बदल जाएगा। ट्विटर के इस्तेमाल का नजरिया बदल जाएगा। हालांकि, खुद एलन मस्क भी इसे अभिव्यक्ति की आजादी का बड़ा प्लेटफॉर्म मानते हैं लेकिन यह संयोग है या प्रयोग कि जिस ट्विटर की नीतियों के मस्क विरोधी रहे हैं, उसी कंपनी (ट्विटर) को उन्होंने न केवल खरीदा बल्कि इसे मजेदार बनाने और फेक यूजर्स से लेकर यूजर्स पर प्रतिबंध और लगाम को लेकर सजग दिख रहे हैं। उन्होंने फंड जुटाने के लिए के 44 लाख शेयर भी बेच दिए। बदलाव की बयार की पहल शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में इसका असर भी दिखे।


ताना-बाना बिगड़ने पर सरकार सजग

अली-बजरंगबली, हनुमान चालीसा-अजान जैसे विवादों के बीच सोशल मीडिया के ज्यादातर प्लेटफॉर्म कटुता परोसने का माध्यम बन कर रह गए हैं। सरकार भी सोशल मीडिया को लक्ष्मण रेखा के दायरे में लाने के लिए सजग है, ताकि सामाजिक ताना-बाना बिगड़ने पर जिम्मेदारी तय हो सके।

अभी हाल में सरकार ने जहांगीरपुर हिंसा, हिजाब विवाद के मद्देनजर टीवी चैनल्स को भी अली-बजरंग बली जैसे शीर्षक से खलबली मचाने से परहेज करने को चेताया। इतना ही नहीं समाज में नफरत का जहर उगलने वाले 6 पाक चैनल्स समेत 16 और यू ट्यूब चैनलों को प्रतिबंधित किया है। जिस सोशल मीडिया से सामाजिक सौहार्द की अपेक्षा की जाती है, फिजा बिगाड़ने से लेकर देश विरोधी गतिविधियों में जाने-अनजाने यदि उसी की संलिप्तता बढ़ती जाए तो चिंता स्वाभाविक है।


प्लेटफॉर्म कोई हो, पैमाना निष्पक्षता ही होना चाहिए

ऐसा नहीं कि सोशल मीडिया या मीडिया पर पहली बार कॉरपोरेट के हाथ है। वाशिंगटन पोस्ट पर अमेजन, टाइम मैगजीन पर सेल्स फोर्स के सह संस्थापक मार्क वैनी, अलीबाबा के जैक का साउथ चाइना मूविंग पोस्ट में निवेश जैसे कई मिसाल हैं। सोशल मीडिया पर यदि सामाजिक कटुता परोसने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सौहार्द के लिए हो, और हवा बदले तो इसमें हर्ज क्या है।

आज अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर जो दो धाराएं बंटी हैं, वह घातक है। ऐसे में पक्ष-विपक्ष के बीच निष्पक्ष की गुंजाइश कम होती जा रही है। प्रिंट हो डिजिटिल, सोशल मीडिया हो इलेक्ट्रॉनिक्स चैनल्स, निष्पक्षता ही हमें आगे बढ़ाती है। सबसे तेजी से संदेश पहुंचाने वाले कबूतर (ट्विटर) की उड़ान को भले पंख लगे हों लेकिन जिस जैक ने इस कंपनी को शुरू किया था, वहीं नीतियों की वजह से कंपनी से बाहर हाशिये पर चले गए और एलन मस्क के सौदे से पहले से यह स्वतंत्र निवेशकों के बोर्ड द्वारा संचालित हो रही थी।

मीडिया हो या सोशल मीडिया उसकी तटस्थता, निष्पक्षता और सामाजिक सरोकार ही सर्वोपरि है, इसी भरोसे के बूते वे खुद को अरसे तक बड़ा और खड़ा रख पाते हैं। इसी निष्पक्ष और मीठी-मीठी बातों से सामाजिक सरोकार और राष्ट्रहित में मिठास की उम्मीद की जा सकती है। सो, अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी यदि बदलाव की बयार की आस जग रही है तो कुछ मीठा हो जाए.... का बहाना तो बनता ही है।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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