विक्रमी संवत 2074 मंगलवार से शुरू हो गया है। हरकी पैड़ी सहित कई स्थानों पर पूजन के बाद पंचाग वितरित किए गए। इसी के साथ हिंदू कलेंडर का नया विक्रमी वर्ष शुरू हो गया है।
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ganga
विक्रमी संवत के 60 नाम हैं। प्रतिवर्ष एक नए नाम का संवत आता है, जिसका उपयोग वर्ष भर के संकल्पों में किया जाता है। इस संवत का नाम साधारण है। मान्यता है कि साधारण नाम संवत्सर से आमजन का कल्याण होता है। यह संवत सबका हितकारी है।
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मंगलवार को हरकी पैड़ी पर गंगा सभा के संयोजन में मां गंगा का भव्य पूजन नववर्ष के उपलक्ष्य में किया गया। दोपहर के समय भी गंगाजी की आरती उतारी गई। आरती के बाद सभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा, सभापति कृष्ण कुमार शर्मा, महामंत्री रामकुमार मिश्रा, स्वागत मंत्री श्रीकांत वशिष्ठ, आशु शिवपुरी आदि ने एक साथ बैठकर पंचाग पूजन किया।
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अन्य धार्मिक संस्थानों ने भी नववर्ष के पंचाग प्रकाशित कर पूजन किया। कुशावर्त घाट पर पंडित हरिओम जयवाल शास्त्री के आचार्यत्व में सैकड़ों पंडितों ने गंगा पूजन के बाद मां गंगा की आरती उतारी। सायंकाल हरकी पैड़ी पर गंगा की भव्य आरती आयोजित की गई।
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नए वर्ष पर कई धार्मिक क्षेत्रों में नए खाते शुरू करने की परंपरा है। ये खाते वर्ष भर के धार्मिक आयोजनों को लेकर तैयार किए जाते हैं। प्रातकाल हरकी पैड़ी पर विभिन्न भागों से आए हजारों श्रद्घालुओं ने डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। कुशाघाट पर अनेक श्रद्घालुओं ने यज्ञोपवीत और मुंडन संस्कार संपन्न कराएं।
प्राचीन मां चामुंडा देवी उत्थान समिति वर्ष के दोनों नवरात्रों में बिल्केश्वर पर्वत स्थित सोनार कोठी के चामुंडा देवी मंदिर में जाने का प्रयत्न करती है। हर साल वन विभाग और राजाजी पार्क के अधिकारी इस दल को जंगल प्रवेश से रोक देते है। पूर्व घोषणा के दौरान मंगलवार की सबेरे समिति के कार्यकर्ता हरकी पैड़ी से जल लेकर पर्वत की तलहटी में पहुंचे। जाने वालों में पदाधिकारी सुनील शर्मा, नंद गिरि बाबा, मंजू यादव, कन्हैया शरण, हनुमान पुरी, लक्कड़बाबा, बिन्दु गिरि, भारती बिष्ट, प्रकाशवती आदि शामिल थे। राजाजी टाइगर रिजर्व में प्रवेश नहीं करने दिया।