जब अपने खोए हुए पति की राह देखते हुए एक पत्नी की आंखे पथरा गई तो वह जिंदगी से हारने लगी। लेकिन 11 साल बाद पति अचानक उसके सामने आया तो दोनों ने अपने जस्बात कैसे बयां किए, तस्वीरें देखकर आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं।
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मानसिक बीमारी का दंश क्या होता है, यह तो केवल पृत्वीपाल ही बयां कर सकते हैं। इस बीमारी ने पृथ्वीपाल को न केवल अपनों से अलग कर दिया बल्कि वह खुद भी दर दर की ठोकरें खाते रहे।
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लेकिन जब 11 साल बाद वह अपने घर लौटे तो उनकी पत्नी अपने अंदर समेटे हुए आंसूओं के तूफान को रोक नहीं पाई। पत्नी को सामने देख पृथ्वीपाल भी फूट फूट कर रोए।
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बता दें कि 11 साल पहले पृथ्वीपाल भटककर गुजरात पहुँच गये। यहां उन्हें मानव सेवा परिवार संस्था में भर्ती कराया गया। इसके बाद उनकी मानसिक हालत को देखते हुए प्रथ्वीपाल को मुम्बई के श्रद्धा पुनर्वसन संस्था में भर्ती किया गया जहाँ उनका पूर्ण रूप से मानसिक उपचार किया गया।
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ठीक होने पर उन्होंने अपने परिवार के बारे में जानकारी दी। इसके बाद श्रद्धा संस्था से जुड़े बरेली के मनोवैज्ञानिक और समाज सेवी शैलेश शर्मा उनको लेकर उनके गाँव घोरीया हल्सोन पहुँचे तो पूरे गाँव के लोगों का तांता लग गया और परिवार के लोगों की खुशियों का ठिकाना नही रहा।
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करीब 55 वर्षीय प्रथ्वीपाल बेतालघाट तहसील के गावं घोरीया हल्सोन के रहने वाले है। उनकी पत्नी चंद्रा देवी ने बताया की उनके पति मानसिक रूप से बीमार थे उनका इलाज भी चल रहा था लेकिन वे घर से अचानक लापता हो गये। उनको बहुत जगह तलाश किया लेकिन वह नही मिली, तब उन्होने अपनी पति के लौट के आने की उम्मीद भी छोड़ दी थी किन्तु जब शैलेश शर्मा उनको सही सलामत घर ले आये तो उनको ये किसी अजूबा से कम नही।
पृथ्वीपाल के दो बेटियाँ और दो बेटे भी हैं, जिनमें एक बेटी हेमा का विवाह भी हो गया। प्रथ्वीपाल के सभी बच्चे अब बड़े हो गये हैं। उनका कहना है कि अब वो अपने बाकी बच्चो की शादी धूमधाम से करेंगे।