मेरठ के चर्चित नेहा वर्मा हत्याकांड में पीड़ित परिवार को इंसाफ का इंतजार हैं। पांच साल में पुलिस सिर्फ एक गवाही करा पाई। जबकि इस हत्याकांड में पुलिस ने 14 गवाह बनाए हैं। तीनों आरोपी जमानत पर बाहर हैं। इस केस में वाहन माफिया हाजी गल्ला के बेटे का नाम भी सामने आया था। हालांकि पुलिस ने सेटिंग कर उसको हत्या में नामजद नहीं किया था। इस केस में पुलिस की विवेचना पर भी सवाल उठ रहे हैं। आगे तस्वीरों में जानें आखिर कैसे साल दर साल उलझता रहा यह चर्चित हत्याकांड: -
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मृतक नेहा के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
हत्या कर शव फेंका था
जिमखाना मैदान के पास 17 अप्रैल 2014 को एक युवती का शव मिला था। जिसके सिर और पेट पर गोली लगी थी। उसके साथ लूट होने का भी अंदेशा जताया था। तीसरे दिन युवती की पहचान नेहा वर्मा पत्नी विपिन वर्मा निवासी भूड़ भारत विजयनगर गाजियाबाद के रूप में हुई थी। इसकी जानकारी लगने पर पुलिस महकमे में खलबली मच गई थी।
दूसरे समुदाय के युवकों पर आरोप
पुलिस की जांच में सामने आया कि नेहा वर्मा की वसीम इलाही उर्फ अली निवासी शाहपीर गेट कोतवाली से जान पहचान थी। वसीम ने महिला को फोन कर मेरठ बुलाया। उसके बाद वसीम ने अपने दोस्त आसिफ उर्फ बुसरी निवासी खैरनगर और शुऐब निवासी फतेहउल्लापुर लिसाड़ी गेट के साथ मिलकर नेहा की हत्या की। पति विपिन वर्मा की तहरीर पर नामजद केस हुआ और तीनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा।
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मामले में खुलासा करते तत्कालीन पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
लव जिहाद बताकर हुआ था हंगामा
गाजियाबाद की महिला को मेरठ में बुलाकर दूसरे समुदाय के युवकों द्वारा हत्या करने के मामले को भाजपा व हिंदू संगठन के लोगों ने लव जिहाद बताकर कोतवाली थाने और एसपी सिटी ऑफिस में हंगामा भी किया था। मामला सांप्रदायिक तूल पकड़ने लगा था। इसी दौरान सोतीगंज के वाहन माफिया हाजी गल्ला के बेटे का नाम भी सामने आया। जिसको पुलिस ने साठगांठ करके क्लीनचिट दे दी थी।
14 गवाह बने, सिर्फ एक गवाही
सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला ने बताया कि नेहा हत्याकांड का मामला एडीजे-11 की कोर्ट में चल रहा है। इस केस में कोतवाली पुलिस ने दरोगा प्रभाकर केंतुरा, जितेंद्र कुमार (दरोगा), विपिन वर्मा (पति), मधु (मां), रमेश जोशी, रमेश दुकानदार, आबिद, इंतजार, इरशाद, इकरामुद्दीन, गुड्डन, नदीम, डॉ. विक्रम सिंह (जिला अस्पताल डॉक्टर), विजय पाल को गवाह बनाया गया। जिसमें सिर्फ वादी विपिन वर्मा की गवाही हो पायी है। अन्य गवाहों की गवाही भी जल्द कराएंगे।
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नेहा की हत्या के बाद उसकी मां का संभालता मृतका का पति
- फोटो : अमर उजाला
कोई चश्मदीद गवाह नहीं है
आरोपी आसिफ पक्ष से सीनियर अधिवक्ता चंद्रपाल सिंह का कहना है कि इस केस में चश्मदीद गवाह नहीं है। आरोप झूठे हैं, जिसके बचाव में सुबूत पेश किए है। शुऐब के अधिवक्ता सलाउद्दीन ने बताया कि पुलिस अभी एक ही गवाह कोर्ट में प्रस्तुत कर पाई है। दो दरोगा और जिला अस्पताल के डॉक्टर भी गवाह हैं। हत्या में तीन लोगों को नामजद किया गया है। तीनों के खिलाफ पुलिस के चार्जशीट में कोई पुख्ता सुबूत पेश नहीं किए हैं।
कमजोर नींव तैयार की
नेहा हत्याकांड में पुलिस ने कमजोर नींव तैयार की। हत्या के पीछे आरोपियों का उद्देश्य और आरोपियों की भूमिका पुलिस ने स्पष्ट नहीं की। इस केस में आरोपी वसीम इलाही को मुख्य आरोपी बनाया। जबकि अन्य दो नामजद आरोपी आसिफ और शुऐब की भूमिका का जिक्र पुलिस की विवेचना में नहीं दिया गया।
साल 2014 में अमर उजाला में प्रकाशित हत्याकांड की खबरें
- फोटो : अमर उजाला
सीनियर अधिवक्ता अमित दीक्षित के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय भी कहता है कि किसी हत्या के मामले में परिस्थिति जन साक्ष्य को जोड़कर केस को मजबूत खड़ा करना चाहिए। आरोपियों के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा सुबूत विवेचना में पुलिस को प्रस्तुत करने होते हैं। जिस पर आरोपियों पर कोर्ट को निर्णय लेना होता है। नेहा की हत्या में पुलिस ने परिस्थिति जन साक्ष्य को नहीं जोड़ा। एक्सपर्ट विवेचक से इसकी जांच नहीं कराई। आरोपियों की परेड तक नहीं हुई।
हत्या जैसे मामलों में साक्ष्य जुटाकर केस मजबूत बनाने के लिए मॉनिटरिंग सेल का गठन किया गया है। केस में विवेचक ने क्या लापरवाही की है या फिर केस और कैसे मजबूत होगा, इसकी जानकारी मॉनिटरिंग सेल से दी जाने लगी है। नेहा हत्याकांड के मामले की जानकारी भी जुटाई जाएगी। -नितिन तिवारी, एसएसपी
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