तीन जवान बेटियों ने अपने पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए अर्थी को कंधा दिया। यही नहीं इंकलाबी नारों के साथ रंगमंच की दुनिया के चमकते चेहरे को अखिरी विदाई दी गई।
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प्रसिद्ध नाटककार प्रो. अजमेर सिंह औलख का शुक्रवार को राम बाग में इंकलाबी नारों और गीतों की गुनगुनाहट के बीच अंतिम संस्कार कर दिया गया। प्रो. औलख की बेटियों सुपनदीप कौर, सोहज प्रीत कौर और अजमीत कौर ने उनकी अर्थी को कंधा दिया और चिता को मुखाग्नि दी।
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संस्कार से पहले प्रो. औलख की पार्थिव देह को लेकर मजदूर और किसान जत्थेबंदियों की अगुवाई में शहर में इंकलाबी नारों से काफिला निकाला गया। बाद में बिना किसी धार्मिक रस्म के इंकलाबी नारों व गीतों के बोलों के बीच उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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अंतिम दर्शनों के लिए किसान जत्थेबंदियां, लेखक, प्रशासनिक अधिकारी, मजदूर जत्थेबंदियां और राजनीतिक पार्टियों के सदस्य पहुंचे। मौके पर नॉवलकार बलदेव सिंह सड़क नामा, डॉ. हरशिंद्र कौर, कहानीकार कृपाल कजाक, फिल्म अदाकार व गायक बलकार सिद्धू, दर्शन औलख, प्रो. अच्छू सिंह, पूर्व विधायक हरदेव सिंह अर्शी, विधायक नाजर सिंह मानशाहिया, मंजू बंसल, डीसी धर्मपाल गुप्ता, एसएसपी परमवीर सिंह परमार तथा नाटक मंडलियां पहुंची। इस दौरान स्थानीय सरकार मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू, गायक गुरदास मान, हंसराज हंस, सरदूल सिकंदर, विधायक हरविंदर सिंह फूलका के शोक संदेश भी पढ़कर सुनाए गए।
पंजाबी नाटककार प्रो. अजमेर सिंह औलख का शुक्रवार सुबह अंतिम संस्कार मानसा के रामबाग में किया गया। 15 जून को उनका मानसा स्थित घर पर निधन हो गया। उन्हें कैंसर था।