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82 की उम्र, लेकिन हैण्ड राइटिंग ऐसी की अच्छे-अच्छे पीछे छूट जाएं

Tue, 09 May 2017 05:46 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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ranjeet - फोटो : amarujala
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है वैसे -वैसे ही इंसान की स्मरण शक्त‌ि और लेखन कला पीछे छूटने लगती है। लेकिन हम आपको आज एक ऐसे सख्‍श के बारे में बताने जा रहे हैं ज‌िनकी 82 की उम्र में भी ऐसी लेखनी है क‌ि अच्छे -अच्छे पीछे छूट जाएं।
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उम्र के जिस पड़ाव में व्यक्ति बिस्तर पकड़ लेता है, उस पड़ाव में रुड़की निवासी एक व्यक्ति अधिकारियों और बच्चों को लिखना सिखा रहे हैं। हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं की लिखावट में दक्ष 82 साल के बुजुर्ग का शहरवासी भी लोहा मानते हैं। 
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यही कारण कि तमाम विद्यालयों और संस्थानों की ओर से उन्हें सम्मानित कर प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए हैं। रुड़की के रामनगर निवासी रणजीत राय मल्होत्रा ने वर्ष 1965 में इकोनामिक्स में एमए किया था। 

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इसके बाद सेना में भरती हो गए, जहां सेना के जवानों और अफसरों को भी लेखन कला की बारीकियां सिखाते रहे। सेना से रिटायर्ड होने के बाद भी उनके लिखावट का शौक बरकरार रहा। 
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इसके बाद से पहले देहरादून और फिर रुड़की में रहकर हजारों की संख्या में बच्चों, अफसरों और शिक्षकों को लिखावट का ज्ञान देते रहें। उनका कहना है कि यह कला उन्हें परमात्मा की कृपा से मिली है। 
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आज भी वह तमाम शिक्षण संस्थानों में जाकर बच्चों को लिखावट की बारीकियां बताते हैं। उनका कहना है कि हाल ही में उन्होंने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में ट्रेनिंग लेने आए शिक्षकों को भी लिखावट के गुर सिखाए। उनका कहना है कि जब तक जान में जान हैं तब तक वह इस कला को आगे बढ़ाते रहेंगे।
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