Bastar Dussehra
- फोटो : सुमन डुग्गर
देवी-देवताओं को भेजा जाता है आमंत्रण
बड़ी बात यह है कि पर्यटक ही नहीं, यहां देवी-देवता भी दशहरा देखने जाते हैं। देवी-देवताओं को दशहरा देखने के लिए आमंत्रण भी दिया जाता है। बस्तर के तहसीलदार द्वारा समस्त ग्रामों के देवी देवताओं को दशहरा में शामिल होने के लिए आमंत्रण भेजा जाता है। जिसमें 6166 ग्रामीण प्रतिनिधि बस्तर दशहरे की पूजा विधान को संपन्न कराने के लिए विशेष तौर पर शामिल होते हैं। इसके साथ ही हजारों देवी-देवताओं के साथ लाखों ग्रामीण बस्तर दशहरा में शामिल होते हैं। बस्तर विशिष्ट परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध है। इसमें ऐतिहासिक बस्तर दशहरे में देवी-देवताओं, पुजारी, मांझी, परगना प्रमुख और मुखिया की भी प्राचीन परंपरा रही है। इस परंपरा को सहेजकर रखने के लिए जिला प्रशासन की ओर से भी कदम उठाए जा रहे हैं।
बस्तर दशहरा में शामिल होने वाले देवी-देवताओं में रांधना, कोकोड़ी, बालोंड, भाटगांव, पिटिसपाल, पाथरी, बालेंगा, मांडोकीखरगांव, खुटडोबरा, चरकई, खालेपारा, कोपाबेड़ा, अरगुला, तारगांव, छोटेराजपुर, किबेकोंगा, डोडरेसिमोड़ा, तितरवंड, बड़डोई, डोंगरसिलाटी, हल्दा, बिवला, आमानार, गम्हरी, फुंडेरपानी, गडरासिमोड़ा की मां हिंगलाजिन, मावली माता, आंगादेव, बूढ़ी माता, शीतला माता, चिलगाईन माता, फुलकुंवर, कुंवारी मावली, सोनादई, भंडारिन माता आदि शामिल हैं।