फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छत्तीसगढ़ में आज धूमधाम से मन रहा छेरछेरा पर्व: घर-घर पहुंच रहे बच्चे, जानिये क्यों मनाते हैं ये त्योहार

Mon, 13 Jan 2025 02:33 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर

सार

Cherchera Festival 2025: छत्तीसगढ़ में आज 13 जनवरी सोमवार को लोक आस्था का पर्व छेरछेरा बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। 
विज्ञापन
1 of 7
छेरछेरा पर्व पर जश्न मनाते आदिवासी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
Cherchera Festival 2025: छत्तीसगढ़ में आज 13 जनवरी सोमवार को लोक आस्था का पर्व छेरछेरा बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। बच्चे और बच्चियां सुबह से ही टोली बनाकर लोगों के घरों में पहुंचकर छेरछेरा गीत गा रहे हैं। दान मांग रहे हैं। इस मौके पर प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोक पर्व छेरछेरा की बधाई और शुभकामनाएं दी है। प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की है।


 
विज्ञापन

2 of 7
बच्चे और बच्चियों घर-घर जाकर छेरछेरा पर दान मांगते हैं। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सीएम साय ने कहा कि महादान और फसल उत्सव के रूप में मनाया जाने वाला छेरछेरा त्योहार हमारी सामाजिक समरसता, दानशीलता की और समृद्ध गौरवशाली परम्परा का संवाहक है। इसी दिन मां शाकम्भरी जयंती मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शंकर ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी इसलिए लोग धान के साथ साग-भाजी, फल का दान भी करते हैं।

 
विज्ञापन

3 of 7
बच्चियां टोली बनाकर घर-घर पहुंचती हैं। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जानिये क्यों मनाते हैं ये त्योहार...
महादान और फसल उत्सव के रूप मनाया जाने वाला छेरछेरा पर्व छत्तीसगढ़ के सामाजिक समरसता और समृद्ध दानशीलता का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ में छेरछेरा पर्व नई फसल के घर आने की खुशी में और पौष पूर्णिमा के दिन बड़े ही धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से घरों में धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती है।
 

4 of 7
बच्चों के घर पहुंचने पर लोग उन्हें दान में चावल और धान देते हैं। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसी दिन बच्चे एकत्र होकर घर-घर जाकर धान मांगते हैं। बच्चे गाना गाते और झूमते हुए घर-घर जाकर धान मांगते है। सभी लोग बच्चों को धान और चावल दान में देते हैं। किसान बड़े ही धूमधाम के साथ इस पर्व को मनाते हैं। इस त्यौहार के दिन किसानों के घर में धान की नई फसल होने से धान की ढेर लग जाती है।


 
विज्ञापन

5 of 7
बच्चों को चावल और धान दान करती महिला - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रामीण क्षेत्रों लोग धान दान करते हैं। छेरछेरा त्यौहार के दिन शाकम्भारी देवी की पूजा की जाती है। छेरछेरा पर्व से 15 दिन पहले ही बच्चे टोलियां बनाकर घर-घर जाकर दान मांगते हैं।
 
विज्ञापन

6 of 7
बच्चे इस दौरान ढोल-नगाड़े बजाते हुए झूमकर डांस करते हैं। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शंकर ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी, इसलिए लोग धान के साथ साग-भाजी, फल का दान भी करते हैं। इस दिन ‘छेरछेरा, कोठी के धान ल हेरहेरा‘ बोलते हुए गांव के बच्चे, युवा और महिलाएं खलिहानों और घरों में जाकर धान और भेंट स्वरूप रुपए इकट्ठा करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इकट्ठा किए गए धान और राशि से वर्षभर के लिए कार्यक्रम बनाते हैं। वहीं बच्चे दान में मिले रुपए अपने लिए खर्च करते हैं।  इस पर्व में उत्पादित फसल को समाज के जरूरतमंद लोगों, कामगारों और पशु-पक्षियों के लिए देने की परंपरा है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें