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CG: 'आदि शौर्य' को बयां करतीं 650 से ज्यादा मूर्तियां, 53.13 करोड़ की लागत से बना है डिजिटल आदिवासी संग्रहालय

सार

India's first digital tribal museum in Chhattisgarh: यदि आपको बिना बस्तर, सरगुजा गये आदिवासी संस्कृति को देखना और समझना है, तो रायपुर आना पड़ेगा।
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अंग्रेजों का विरोध करते आदिवासी कांतिकारी - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

India's first digital tribal museum in Chhattisgarh: India's first digital tribal museum in Chhattisgarh: यदि आपको बिना बस्तर, सरगुजा गये आदिवासी संस्कृति को देखना और समझना है, तो रायपुर आना पड़ेगा। यहां पर आप आदिवासी संस्कृति की बारीकियों और उसकी गहराई को बखूबी आसानी से समझ सकते हैं। आदिवासी संस्कृति का यह अनुपम, बेजोड़ और अद्भुत संगम है शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय नवा रायपुर (डिजिटल एआई तकनीक पर आधारित देश का पहला म्यूजियम)। 

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आदिवासी वीर नायकों को समर्पित देश का पहला डिजिटल म्यूजियम - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपराओं और स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली गाथा का सजीव प्रदर्शन शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय में देखने को मिलता है।
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14 थीम पर आधारित है यह म्यूजियम - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
यह एक ऐसा अद्वितीय सांस्कृतिक केंद्र है, जो आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से भारत के जनजातीय इतिहास को जीवंत करता है।

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आदिवासी संस्कृति का बेजोड़, मनमोहक मंच - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

संग्रहालय में आगंतुकों को जनजातीय विद्रोहों की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक झलकियाँ देखने को मिलती हैं,जिनमें हल्बा विद्रोह, पारलकोट आंदोलन, भूमकाल क्रांति तथा रानी चो-रिस आंदोलन जैसी उल्लेखनीय घटनाएं शामिल हैं।

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आदिवासियों के रहन-सहन को बयां करती तस्वीर - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
संग्रहालय में 1857 के क्रांतिकारी वीर शहीद वीर नारायण सिंह को विशेष श्रद्धांजलि दी गई है, साथ ही झाड़ा सिरहा जैसे अल्पज्ञात वीरों की शौर्यगाथा भी प्रदर्शित की गई है, जिन्होंने 1825 के पारलकोट आंदोलन का नेतृत्व किया था।
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लोक कला का अनुपम उदाहरण है यह संग्रहालय - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

स्वतंत्रता आंदोलन से आगे बढ़ते हुए, संग्रहालय की 14 थीम आधारित गैलरियाँ जनजातीय जीवन की मूल आत्मा को प्रदर्शित करती हैं। बस्तर की घोटुल परंपरा से लेकर पारंपरिक शिकार, कृषि, मत्स्य पालन, लोक नृत्य-संगीत, लोक उपचार, तथा नवाखानी और उरिदखानी जैसे धार्मिक अनुष्ठानों तक।

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बिटिश हुकूमत का विरोध करते आदिवासी - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

संग्रहालय में मराठा शासनकाल की सुबे व्यवस्था और अंग्रेजी शासन के शुरुआती दौर में जबरन श्रम (बेगार प्रथा) जैसे शोषण के ऐतिहासिक प्रसंग भी दर्ज किए गए हैं।

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अंग्रेजों की ओर से आदिवासियों की प्रताड़ना को प्रदर्शित करती तस्वीर - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

यह संग्रहालय परंपरा और तकनीक का संगम है, जहां आगंतुक एआई फोटो बूथ, डिजिटल स्क्रीन, होलोग्राम, और ऑडियो-वीडियो डिस्प्ले के माध्यम से एक इंटरएक्टिव अनुभव प्राप्त करते हैं।

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आदिवासियों की शौर्य गाथा को बयां करती तस्वीर - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

यह संग्रहालय देशभर में स्थापित किए जा रहे 11 जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों में से एक है, जिसे 1 नवम्बर 2025 को राष्ट्र को समर्पित किया गया। लगभग 9.75 एकड़ क्षेत्र में फैले और 53.13 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस संग्रहालय में 650 से अधिक मूर्तियां, आधुनिक डिजिटल गैलरियाँ, होलोग्राम, 3डी प्रोजेक्शन तथा इंटरएक्टिव एआई-आधारित प्रदर्शनी प्रणाली स्थापित की गई हैं।

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अपने आदिवासी नायक के शहीद होने पर आदिवासियों की व्यथा - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

छत्तीसगढ़ सरकार की जनजातीय कल्याण को लेकर जनजातीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा बताया कि यह संग्रहालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि ‘आदि संस्कृति’ का जीवंत केंद्र है, जो छत्तीसगढ़ की 43 अनुसूचित जनजातियों की विशिष्ट पहचान को संरक्षित और प्रदर्शित करता है।

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अंग्रेजों का डटकर मुकाबला करते आदिवासी - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
यह ज्ञान, अनुसंधान और आजीविका सृजन का भी केंद्र बनेगा। यहां महिलाओं के स्व-सहायता समूहों द्वारा कैंटीन का संचालन किया जा रहा है तथा अन्य कार्यों में भी उनकी भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिससे महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल रहा है।

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शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

यह पहल भारत सरकार की ‘आदि संस्कृति परियोजना’ और ‘एआई आधारित भाषा संरक्षण प्लेटफॉर्म – आदि वाणी’ जैसी योजनाओं से भी जुड़ी है, जिनके माध्यम से गोंडी, मुंडारी, और भीली जैसी जनजातीय भाषाओं को डिजिटल रूप से संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।

 

 

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यह संग्रहालय देशभर में स्थापित किए जा रहे 11 जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों में से एक है - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय इस प्रकार छत्तीसगढ़ की गौरवशाली जनजातीय परंपरा, आधुनिक तकनीक और सामाजिक सशक्तिकरण का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है,जो भारत की जनजातीय विरासत को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 
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