हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के सैद अलीपुर गांव में जन्मे बाबा रामदेव आज एक ब्रांड बन गए हैं। बाबा रामदेव द्वारा पतंजलि के नाम से खड़ा किए गए कारोबार का सालाना टर्नओवर 10 हजार करोड़ के पार पहुंच चुका है।
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- फोटो : अमर उजाला
पतंजलि को ओर ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए रामदेव ने एक नया स्ट्रोक खेला है। बाबा के बिजनेस का ये सिलसिला बढ़ता जा रहा है।
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पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट
बाबा रामदेव के नए पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट शामिल हो गया है। 10 एकड़ में फैले इस रिसर्च इंस्टीट्यूट को लगभग 200 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है। यहां 200 वैज्ञानिक अलग-अलग जड़ी बूटियों पर रिसर्च करेंगे।
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आयुर्वेदिक दवाइयों को अधिक से अधिक साइंटिफिक बनाने के लिए इनका परीक्षण चूहों, खरगोश और सूअर पर किया जाएगा।
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पतंजलि के मैनेजमेंट के मुताबिक इंस्टीट्यूट के साथ-साथ यहां एक हर्बल पार्क भी बनाया गया है। इन दोनों को दो साल में तैयार किया गया है। यहां वर्ल्ड लेवल की 8 लैब्स हैं, इनमें एक साथ विभिन्न बीमारियों के इलाज पर शोध कार्य किया जाएगा।
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पतंजलि का दावा है कि इस इंस्टीट्यूट में रिसर्च के लिए विश्व स्तरीय मशीनें मंगाई गई है। यहां कैसर के इलाज पर भी काम किया जाएगा। रिसर्च में उपयोग किए जाने वाले प्राणियों के लिए अलग से एनिमल हाऊस बनाया गया है। जहां विश्वस्तरीय मानकों का पालन किया गया है।
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औषधियों पर रिसर्च के लिए हर्बल पार्क बनाया गया है। इसके साथ-साथ लैब भी बनाई गई है, जहां मिट्टी, पानी, उत्पादन पर लगातार रिसर्च होगी।
हर्बल पार्क में 900 से ज्यादा औषधियों वाले पौधे लगाए गए हैं।
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पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट में कैंसर जैसी खतरनाक और जानलेवा बीमारियों का इलाज करने वाली प्राकृतिक आयुर्वेदिक दवाएं तैयार की जाएंगी। जाहिर है आयुर्वेद के जरिये कैंसर का इलाज दूसरी पद्धति के मुकाबले सस्ता भी होगा।
एक बर्ड हाउस भी बनाया गया है, जहां अलग-अलग तरह के पक्षी हैं। प्राचीन योग व आयुर्वेद का अहसास करवाने के लिए 5 गुफाओं का भी निर्माण किया गया है। इन गुफाओं में ऋषि मुनियों की मूर्तियां बनाई गई है, जिसे एक म्युजियम की तरह बनाया गया है।