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बस कंडक्टर की इस बेटी ने दिलाया था ओलंपिक में पदक, अब मिलेगा पद्मश्री अवार्ड

Fri, 27 Jan 2017 03:51 PM IST
टीम डिजीटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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साक्षी मलिक को मिलेगा पद्मश्री पुरस्कार
ओलंपिक में एक बस कंडक्टर की बेटी ने देश को महिला पहलवानी में पहला मेडल दिलवाया था। अब इन्हें सबसे बड़ा सम्मान मिला है। जानिए इनके बारे में सब कुछ।
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साक्षी मलिक - फोटो : getty
आत्मविश्वास के बल पर इंसान क्या कर सकता है, इसकी एक बानगी 18 अगस्त 2016 को रियो ऑलिंपिक में देखने को मिला। जहां एक बस कंडक्टर की बेटी ने देश को महिला पहलवानी में पहला मेडल दिलवाया था। 
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Sakshi Malik mother
18 अगस्त 2016 को भारत की लेडी सुल्तान और हरियाणवी शेरनी साक्षी मलिक ने हारी हुई बाजी को अपने आत्म-विश्वास के बलबूते अंतिम 10 सेकंड में पलट दी और रक्षाबंधन के मौके पर हर भारतीय भाई-बहनों को गौरव वाला गिफ्ट दे दिया।
 

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इंटरनेशनल पहलवान साक्षी मलिक - फोटो : अमर उजाला
साक्षी मलिक का जन्म 3 सितम्बर 1992 को हरियाणा के रोहतक जिले के मोखरा गाँव में हुआ था। उनके पिता सुखबीर मलिक दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन में बस कंडक्टर के पद पर कार्यरत है।
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साक्षी मलिक - फोटो : getty
साक्षी की माँ सुदेश मलिक एक आँगनवाड़ी कार्यकर्ता है। उनका एक भाई भी है, जिसका नाम सचिन है। साक्षी ने ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में हुए 2016 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक में कांस्य पदक जीता है। भारत के लिए ओलंपिक पदक जीतने वाली वे पहली महिला पहलवान हैं।
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हरियाणा पहलवान साक्षी मलिक, विनेश फोगट और बबीता फोगट - फोटो : फाइल फोटो
इससे पहले इन्होंने ग्लासगो में आयोजित2014 के राष्ट्रमण्डल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक जीता था। 2014 के विश्व कुश्ती प्रतियोगिता में भी इन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। वो एक जाट समुदाय से है।
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Sakshi malik - फोटो : PTI
2016 ओलम्पिक में साक्षी ने रेपचेज़ प्रणाली के तहत काँस्य पदक हासिल किया। इस मुकाबले में वे एक समय में 5-0 से पीछे चल रहीं थी किंतु शानदार वापसी करते हुए अंत में 7-5 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। 

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साक्षी को तैयार करने वाले हाथ
आखरी कुछ सेकंड में जो दो विजयी अंक उन्होंने जीते उसे प्रतिद्वंद्वी पक्ष द्वारा चैलेंज किया गया, लेकिन निर्णायकों ने अपना फैसला बरकरार रखा और असफल चैलेंज का एक और अंक साक्षी के खाते में जुड़ा जिसे अंतिम स्कोर 8-5 हो गया। 2016 के ओलंपिक में भारत का यह पहला पदक था।
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sakshi malik father
पदक जीतने के बाद उन्हें कई इनाम देने की घोषणा हुई, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
हरियाणा सरकार: 2.5 करोड़
दिल्ली सरकार: 1 करोड़ रुपए
रेलवे : 50 लाख
भारतीय ओलम्पिक संघ : 20 लाख
जेएसडब्ल्यू : 15 लाख
सलमान ख़ान : 1 लाख एक हज़ार
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