फौगाट बहनों की बायोपिक दंगल के गाने बापू तू सेहत के लिए हानिकारक का राज फिल्म के असली 'आमिर खान' ने खोल दिया है। देखिए, गीत का सच।
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द्रोणाचार्य अवार्डी कोच और पिता महाबीर पहलवान ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि मैट पर गीता और बबीता के सामने वह पिता नहीं बल्कि कोच बनकर आते थे। शारीरिक श्रम से जी चुराने पर उनको जमकर लताड़ लगाते थे। इसलिए दोनों बेटियां मुझे सेहत के लिए हानिकारक बताती थीं। गीता की शादी के बाद पिता सहित पांचों फौगाट बहनों को बड़ी बहन और मिनी कोच की कमी भी बेहद खल रही है।
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दंगल मूवी के किरदार बनाम रियल लाइफ के किरदार
महाबीर पहलवाना ने बताया कि बालीवुड अभिनेता आमिर खान ने पहली महिला ओलंपियन पहलवान गीता फौगाट व उसकी छोटी बहन बबीता फौगाट को सफल पहलवान बनाने के पीछे छुपी पहलवान महाबीर फौगाट की अथक मेहनत की कहानी पर दंगल फिल्म में बनाई है। फिल्म के गाने बापू तू सेहत के लिए हानिकारक है पर विवाद भी उपजा है।
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दंगल मूवी के किरदार बनाम रियल लाइफ के किरदार
इस गाने को लेकर जब महाबीर फौगाट से बातचीत की गई तो उन्होंने खिलखिलाकर हंसते हुए कहा- मैट प्य मैं बाप की हैसियत त्य नहीं कोच की हैसियत त्य जाया करता, अर दोणू भाणा न्य कामयाब करण खात्तर जमक्य खिंचाई भी करया करदा। महाबीर पहलवान ने कहा कि अगर मेहनत के मामले में रहम करने की भावना आती तो मन में ही उसे दबा लेता था, यहां तक की गीता की मां दयाकौर के सामने भी बेटियों के लिए एक बार आने वाले रहम के भाव को व्यक्त नहीं किया।
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महावीर फौगाट
उन्होंने बताया कि मुझे डर था कि कही भाव अंदर से निकलने के बाद खुद को उनके सामने सख्त ना रख पाऊं। बड़ी बेटी व शिष्या गीता फौगाट की शादी समारोह के बाद महाबीर अखाड़े में कसरत और कुश्ती के अभ्यास का दौर दोबारा से शुरू हो चुका है। अब गीता के जाने के बाद बबीता, विनेश, रितू, प्रियंका, संगीता आदि सभी बहनें एक-दूसरे की ही कमियां व कमजोर दांव-पेच पर ध्यान दे रही हैं।
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गीता फोगाट
- फोटो : अमर उजाला
गीता के ससुराल जाने के बाद जब महाबीर बाकी बहनों को अभ्यास करवाते हैं तो उन्हें विनेश फौगाट और रितू फौगाट के दांव-पेच में गीता जैसी ही झलक मिलती है। वहीं गीता अब छोटी बहनों को क्षमता, टूर्नामेंट व इसमें भाग लेने के लिए वजन संबंधित टिप्स फोन पर ही दे रही हैं। बेटियों के जीवन पर आधारित दंगल फिल्म के गाने में गीता की मां दयाकौर के योगदान का भी जिक्र है। इसमें वो खुद पहलवान बनने के लिए बेटियों की हौसला अफजाई करती हैं।
दयाकौर ने बताया कि उनके परिवार का सपना था कि बेटियों को पहलवानी क्षेत्र में उतारकर समाज के लिए मिसाल कायम की जाए। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी ममता का गला घोंट लिया। जब भी गीता या बबीता आकर कुश्ती के झंझट से छुटकारा दिलाने के बदले घर का सारा कामकाज करने की बात कहतीं तो वह उन्हें महज एक साल ही ऐसी कठिनाइयां उठाने का झांसा देतीं थी।