13 मार्च को वर्ल्ड स्लीप डे के तौर पर मनाया जाता है। आज हम आपको बताने जो रहे हैं ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया के बारे में। अगर आपका बच्चा मुंह खोलकर सोता है और इस दौरान उसे खर्राटे आते हैं तो सचेत हो जाइये।
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जाने-अनजाने वह ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया का शिकार हो रहा है। जो भविष्य में हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। आमतौर पर टॉन्सिल व एडीनॉयड से ग्रस्त बच्चों में ऐसी समस्या होती है। उन्हें बार-बार सर्दी-जुकाम होता है। इसे माता-पिता जानकारी के अभाव में अनदेखा करते हैं। मुंह खोलकर सोने के कारण जहां एक ओर बच्चे के जबड़े का विकास अवरोधित होता है, वहीं दूसरी ओर उसे ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया का शिकार बना रहा है।
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यह जानकारी पीजीआई ईएनटी डिपार्टमेंट के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. संदीप बंसल ने दी। उन्होंने बताया कि ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया गंभीर हार्ट डिजीज के कारणों में से एक प्रमुख कारण है। जिस बच्चे में शुरुआती दौर से इसके लक्षण दिखते हैं उन्हें हार्ट डिजीज के साथ ही ग्लूकोमा, शुगर, डिप्रेशन और हाइपरटेंशन होने का भी खतरा ज्यादा होता है। इसलिए लक्षणों पर गौर करते हुए समय रहते इसका इलाज बेहद जरूरी है।
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इलाज के तरीके
ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया के इलाज के लिए विशेषज्ञ अलग-अलग विधियों का प्रयोग कर रहे हैं। डॉ. बंसल के अनुसार सबसे कारगर है लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन, जिसमें व्यायाम, वजन पर नियंत्रण को शामिल किया गया है। क्योंकि ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया के 60 से 70 प्रतिशत मरीज ज्यादा वजन के शिकार पाये गये हैं। इसकेअलावा सीपैप मशीन के माध्यम से भी इस पर काबू पाने का प्रयास होता है। अंतिम विकल्प के तौर पर सर्जरी की जाती है।
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सांकेतिक तस्वीर
तेजी से बढ़ रही जागरूकता
डॉ. बंसल ने बताया कि खर्राटे को लेकर लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। कल तक लोग जिसे गहरी नींद में सोना समझकर नजरअंदाज करते थे आज उसका इलाज कराने आ रहे हैं। जागरूकता का ही नतीजा है कि ओपीडी में ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया के मरीजों की संख्या महज एक साल में दो से 10 हो गई है। वहीं हर महीने 20 से 25 स्लीप स्टडी हो रही है। लोगों को जागरूक करने के लिए ही हर साल 13 मार्च को वर्ल्ड स्लीप डे मनाया जाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
ये लक्षण दिखें तो संभल जाइए
तेज आवाज के साथ आने वाले खर्राटे से दूसरों को परेशानी होने लगे। दिनभर थकान और अनिद्रा महसूस होना। बीच-बीच में सांस अवरोधित होने की आवाज। झटके के साथ शरीर के अन्य अंगों का हिलना। बेचैनी से करवट बदलना। जगने के बाद सिर में भारीपन। मुंह सूखना और चिड़चिड़ापन होना।
इनको ज्यादा खतरा
ज्यादा वजन वाले लोगों को, जिनका जबड़ा छोटा हो, टॉन्सिल व एडीनॉयड से ग्रस्त बच्चों में, मेनोपॉज के बाद महिलाओं में।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
ऐसे होती है स्लीप टेस्ट
लक्षणों के आधार पर विशेषज्ञ मरीज की स्लीप टेस्ट करते हैं। ये टेस्ट पॉली सोनोग्राफी मशीन से की जाती है। इसे करने में एक रात का समय लगता है। उस दौरान मरीज के अलग-अलग बॉडी पार्ट पर 10 से 12 लीड लगाये जाते हैं। टेस्ट के दौरान ब्रेन, हार्ट, मांसपेशियों की ईसीजी करने के साथ ही सांस की रफ्तार और खर्राटे का मापन किया जाता है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर तय होता है कि मरीज को ऑब्स्ट्रक्टिव स्लिप एप्निया है कि नहीं और अगर है तो उसे किस विधि से इलाज देना है।
ऐसे करें बचाव
वजन कम करने का प्रयास करें। डाइटिंग की बजाय वजन बढ़ाने वाले डाइट को कम करें। हरी सब्जियों और फलों की मात्रा बढ़ायें। शराब और सिगरेट का सेवन बंद कर दें।
ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया को लेकर लोगों में तेजी से जागरूकता बढ़ रही है। यह एक सकारात्मक बदलाव है। कल तक जो खर्राटे लेने को आराम से सोना समझते थे वे उसका इलाज कराने आ रहे हैं। समय रहते इस बीमारी के इलाज से उन लोगों को भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों से सुरक्षित किया जा सकता है। - डॉ. संदीप बंसल, एडिशनल प्रोफेसर, पीजीआई ईएनटी डिपार्टमेंट