17 सवाल और उनके जवाब, जो डायबिटीज के बारे में वो सब जानकारियां देंगे, जिन्हें जानना आपके लिए बेहद जरूरी है। वरना पछताना पड़ सकता है, तो पढ़ें...
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diabetes
पीजीआई सहित अन्य संस्थानों की रिसर्च कहती है कि चंडीगढ़ डायबिटीज की राजधानी बनती जा रही है। आईसीएमआर के साथ पीजीआई की एक रिसर्च में सामने आ चुका है कि यहां के 13 प्रतिशत लोग डायबिटीज की चपेट में हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत सात प्रतिशत है। यानि दोगुने के करीब। यही नहीं करीब इतने लोग प्री डायबिटीज की चपेट में हैं। इसका मतलब यह है कि यदि इन लोगों ने अपनी बीमारी को काबू नहीं किया तो अगले तीन से चार साल में ये मरीज भी डायबिटीज की चपेट में आ जाएंगे। पीजीआई के विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि मरीज डायबिटीज का मैनेजमेंट सही तरीके से करें तो इसे बहुत ही आसानी से निपटा जा सकता है। पीजीआई के तीन विशेषज्ञों से इंटरव्यू किए गए हैं, जो मरीज और आम लोगों के लिए काफी उपयोगी है।
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प्रो. संजय बडाडा, एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट, पीजीआई से बातचीत
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सवाल : डायबिटीज क्या है
जवाब : डायबिटीज एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है। हम जो भी खाना खाते हैं, वह ग्लूकोज में बदलकर खून में जाता और एनर्जी देता है। पैंनक्रियाज से निकलने वाला इंसुलिन हॉर्मोन ग्लूकोज को ब्लड सेल्स में जाने और ब्लड लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है। जब इंसुलिन लेवल गड़बड़ा जाता है तो डायबिटीज होती है। डायबिटीज दो प्रकार की है। टाइप वन और टाइप टू। आमतौर पर टाइप वन बचपन में हो जाती है, जबकि टाइप टू गलत लाइफस्टाइल, मोटापा और बढ़ती उम्र की वजह से होती है।
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डायबिटीज
- फोटो : Self
सवाल : इसका कैसे पता लगाया जा सकता है?
जवाब : इसके लिए ब्लड शुगर का टेस्ट करवाना पड़ता है। यदि खाली पेट ग्लूकोज की मात्रा 100 से 125 है तो इसका मतलब है कि मरीज प्री डायबिटीज की चपेट में है। प्री डायबिटीज को डायबिटीज की पहले की स्थिति को कहते हैं। नार्मल व्यक्ति का खाली पेट शुगर लेवल 100 के नीचे होता है। 125 से ऊपर का मतलब मरीज डायबिटीज के चपेट में है। खाना खाने के बाद 140-199 आए तो प्री डायबिटिक और 200 के ऊपर डायबिटीज। एक टेस्ट और होता है, जिसे एचबीवनसी कहते हैं। इसकी नार्मल वैल्यू 5.7, प्री डायबिटीज 5.7 से 6.4 और 6.5 से ऊपर डायबिटीज। इस टेस्ट को एवरेज ब्लड शुगर टेस्ट भी कहते हैं। इससे पिछले तीन महीने के ऐवरेज ब्लड शुगर लेवल का पता लग जाता है।
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diabetes
सवाल : डायबिटीज के क्या लक्षण होते हैं?
जवाब : ज्यादा प्यास लगना, ज्यादा भूख लगना, वजन कम होना, पेशाब ज्यादा आना, कई बार पेशाब में इंफेक्शन से इसका पता लगता है तो कई बार गुर्दा फेल होने पर जानकारी मिलती है।
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डायबिटीज
सवाल : क्या डायबिटीज को ठीक किया जा सकता है
जवाब : डायबिटीज जिंदगी के साथ चलने वाली बीमारी है। यह मरीज पर निर्भर करता है कि वह अपनी बीमारी को मैनेज और कंट्रोल कैसे रखता है। मेरे कई ऐसे मरीज हैं, जिन्हें कई साल से डायबिटीज है मगर उन्होंने इस तरह से कंट्रोल किया है कि उन्हें कोई दिक्कत नहीं आई। नार्मल व्यक्ति की तरह वह अपनी जिंदगी जी रहे हैं। बैराट्रिक सर्जरी से कुछ साल के लिए डायबिटीज खत्म हो जाती है।
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डायबिटीज
सवाल : क्या कदम उठाएं, जिससे डायबिटीज दूर रहे।
जवाब : बहुत ही सरल तरीका है। रोजाना एक्सरसाइज करें। कम से कम 45 से 60 मिनट मैदान या जिम में निकाले। डाइट को कंट्रोल में रखे। ज्यादा खाने के बजाय टुकड़ों में खाएं। वजन को कंट्रोल में रखें। तनाव को बाय-बाय करें। फैमिली हिस्ट्री है तो 30 साल की उम्र के बाद समय-समय पर डायबिटीज का टेस्ट करवाएं।
प्रो. अनिल भंसाली एचओडी एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट से बातचीत
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डायबिटीज
सवाल : डायबिटीज कंट्रोल नहीं होने पर शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है
जवाब : इसका शरीर के हर अंग पर प्रभावित होता है। आपके पांच से सात साल तो निकल सकते हैं, मगर उसके बाद अंगों पर असर पड़ने लगता है। डायबिटीज होने पर खाने से मिली एनर्जी खून में ही घूमती रहती है, जिससे ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ जाता है। सही इलाज और मैनेजमेंट न हो तो डायबिटीज के मरीजों को हार्ट अटैक, लकवा, किडनी फेल्योर, आंखों की समस्या, पैरों की समस्या, पुरुषों में नपुंसकता और महिलाओं में बांझपन, कंधे का जाम होना जैसी बीमारियों का खतरा रहता है।
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सवाल : डायबिटीज को कंट्रोल करने का तरीका क्या है
जवाब : तीन बाते हैं, जिन्हें मरीजों को ध्यान रखना होगा। सबसे पहले मरीज को अपने डॉक्टर से साल भर में कम से कम चार बार जरूर मिलना चाहिए। जब मरीज का फॉलोअप ठीक होता है तो छोटी-छोटी बीमारियां में पकड़ में आती है। जैसे ब्लड प्रेशर, यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रोल। दूसरा, इंसुलिन लेने में बिल्कुल मत हिचकिचाएं। कई मरीज इंसुलिन लेने में आनाकानी करते हैं। वे सोचते हैं दवाई खा लेने से सबकुछ ठीक हो जाएगा, जबकि ऐसा नहीं होता। तीसरा, रेग्युलर एक्सरसाइज करें। रोजाना 45 मिनट। मेरा मानना है कि डायबिटीज को आप पालतू बना सकते हैं। लोग कहते हैं कि अभिशाप है और मैं कहता हूं कि वरदान है। रेग्युलर चेकअप से आपकी छोटी-छोटी बीमारियां पकड़ में आती है।
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सवाल : डायबिटीज के मरीज का खाना-पीना कैसा होना चाहिए
जवाब : तीनों टाइम के खाने में चार रोटी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। तीन तरह के फल खा सकते हैं। दो तरह की सब्जियां और अनलिमिटेड सलाद। कुछ लोग आठ से दस रोटी खाते हैं, जो ठीक नहीं है। रेडीमेड आटे के बजाय चौकर वाला आटा खाएं। इससे मरीज को फाइबर मिलता है। साधारण आटे के बजाय मल्टीग्रेन आटे का इस्तेमाल भी बेहतर रहता है। यदि खाना खाने से आधा घंटे पहले दो गिलास पानी पीया जाए तो भूख कम लगती है। इससे वजन कंट्रोल में रहता है।
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मधुमेह
सवाल : इंसुलिन लेने का सही तरीका क्या है
जवाब : इंसुलिन को लेकर कई सवाल होते हैं। लोग कहते हैं कि इंसुलिन को फ्रिज में रखना होता है, जबकि आप रूम टेम्प्रेचर में इसे रख सकते हैं। इंसुलिन को जब खोले तो उसे 30 दिन के भीतर खत्म कर दें। इंसुलिन को नाभि के चार अंगुली छोड़कर दाई तरफ और बाई तरफ अलग-अलग जगहों पर लगा सकते हैं। एक ही जगह इंसुलिन लगाने से पेट में गांठे पड़ती हैं और इंसुलिन का प्रभाव भी कम होता है। इसलिए रोजाना जगह बदलकर लगाएं।
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डायबटीज
- फोटो : getty images
सवाल : चंडीगढ़ डायबिटीज का कैपिटल क्यों बन रहा है।
जवाब : सुखना और चंडीगढ़ के अन्य पार्कों में सिर्फ बुजुर्ग ही कसरत करते दिखाई देते हैं। यंगस्टर नहीं दिखते हैं। चंडीगढ़ के लोगों की लाइफ स्टाइल आरामदायक वाला है। दूसरा, यहां के जो लोग कालोनी में रहते हैं, उनमें डायबिटीज तेजी से बढ़ रहा हैं, क्योंकि वे जंक फूड ज्यादा खा रहे हैं। जंक फूड काफी सस्ता है और वे आसानी से इसे खा लेते हैं। तीसरा, यहां पर जागरूकता है तो ज्यादा से ज्यादा लोग इसका चेकअप करवा रहे हैं। यह भी एक वजह हो सकती है।
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डायबिटीज
सवाल : कोई करेला खाने को कहता है तो कोई जामुन, क्या कहना है
जवाब : करेला, जामुन, मैथी और हल्दी खाने की बात लोग जरूर करते हैं, लेकिन कोई साइंटिफिक स्टडी नहीं है। इनके खाने से शुगर थोड़ी कम होती है, लेकिन दवाइयों और फॉलोअप से इसे बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं।
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doctor
- फोटो : डेमो
सवाल : दुनिया कह रही है कि एवरेज ग्लूकोज 8 रहे तो, तब भी काम चल सकता है
जवाब : मेरे एक स्टूडेंट ने स्टडी की है, जिसमें बताया गया है कि यदि एवरेज ग्लूकोज सात के नीचे रहता है तो शरीर की प्रत्येक कोशिका की क्षमता अच्छी तरह से काम करती है। मेरा मानना है कि एवरेज ग्लूकोज सात के नीचे होना चाहिए।
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doctor
- फोटो : amar ujala
सवाल : शुगर के कितने मरीजों के पैर खराब होने की संभावना रहती है।
जवाब : करीब एक तिहाई मरीजों की। तीन तरह से पैर खराब होते हैं। पहला घाव या पस पड़ना, पैर काला पड़ना या गैंगरीन होना, पैर की हड्डियों का टूटना। गैंगरीन में रक्त कोशिकाएं बंद हो जाती हैं और पैर काला पड़ने लगता है। हड्डियां टूटना भी एक गंभीर बीमारी होती है।
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मेडिकल कॉलेजों
- फोटो : amar ujala
सवाल : पैर की हड्डियां टूटना, इसका क्या मतलब है?
जवाब : एक पैर में 26 हड्डियां होती हैं। 90 फीसदी मरीजों में यह डाइग्नोज नहीं हो पाता। इसमें एक पैर में सूजन के साथ लाल होता है और दूसरा पैर ठीक रहता है। इस बारे में डॉक्टर भी अवेयर नहीं होते। वे इंफेक्शन समझकर एंटीबायोटिक देते हैं, जबकि वह इंफेक्शन नहीं होता। पीजीआई में जब मरीज आता है, तब तक हड्डियां टूट चुकी होती हैं, जबकि इसे एक साधारण से एक्सरे से साफ तौर पर पहचाना जा सकता है।
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consult doctor
सवाल : क्या गैंगरीन भी गंभीर बीमारी है?
जवाब : बिल्कुल। गैंगरीन में पैर काला पड़ने लगता है। रक्त की सप्लाई बंद होती है, जिनमें गैंगरीन की शिकायत होती है, उनमें साधारण लोगों के मुकाबले सात गुना ज्यादा हार्ट अटैक आने की संभावना रहती है। क्योंकि जिस मरीज की पैर की नसें ब्लॉक हो सकती है तो उसका सिर और हार्ट की भी। गैंगरीन होने पर पैर में स्टेंट डालकर उसे खोला जाता है।
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सांकेतिक तस्वीर
सवाल : शुगर के मरीजों में पैरों की समस्या कितनी गंभीर है
जवाब : पीजीआई की ही स्टडी है, जिसमें बताया गया है कि जिन शुगर मरीजों में पैर की समस्या होती है उनकी जल्दी मृत्यु होने की संभावना ज्यादा होती है। इसलिए पैर की रोजाना देखभाल करना जरूरी है।
सवाल : पैरों की देखभाल कैसे कर सकते हैं
जवाब : रोजाना पैरों को चेक करें। शुगर को कंट्रोल में रखें। डाक्टर से अपने पैरों की नियमित जांच करवाएं। हवाई चप्पल या पंजाबी जूतियां और फैंसी जूते पहनने के बजाय साधारण जूते पहने। डायबिटीज के मरीजों के लिए खास जूते भी आते हैं। पैरों की सनसनी चेक करनी है।