जुनून हो तो इन तीन बहनों जैसा, पिता ने बेटों की तरह पाला और तीनों ही सेना में लेफ्टिनेंट बनकर उनका सिर फक्र से ऊंचा कर दिया, दिलचस्प कहानी।
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सेना में लेफ्टिनेंट किसान की तीन बेटियां
तीनों बेटियों की दिलचस्प कहानी
रोहतक के किसान प्रताप सिंह देशवाल दो बेटियां प्रीति, दीप्ति और भतीजी ममता ने यह उपलब्धि हासिल की है। तीनों में देशसेवा की इतना जज्बा था कि बचपन में ही सेना में जाने की ठान ली थी। तमाम चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए दो सगी बहनों व एक कजन सिस्टर ने अब सेना की मेडिकल कौर में लेफ्टिनेंट के पद पर ज्वाइनिंग हासिल की है। बेटियों की इस उपलब्धि पर पिता काफी गर्व महसूस करते हैं।
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सेना में लेफ्टिनेंट किसान की तीन बेटियां
मूल रूप से झज्जर के रहने वाले प्रताप सिंह देशवाल ने बताया कि हमारे घर में कोई फौज में नहीं है। पहली बार बेटियों ने जब अपनी सोच बताई तो अजीब लगा। फिर जानकार लोगों से सलाह लेकर बेटियों को पढ़ाने का फैसला लिया। हालांकि पढ़ाई महंगी थी और खेतीबाड़ी के सहारे सब मुमकिन नहीं था, लेकिन बेटियों को बेटों की तरह पाला और दिन-रात मेहनत कर बेटियों को लेफ्टिनेंट बनाकर ही दम लिया।
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सेना में लेफ्टिनेंट किसान की तीन बेटियां
देशवाल कहते हैं कि बेटियों को पढ़ाने से दो घर सुधरेंगे। फिर समाज को एक अच्छा संदेश देना भी था। वहीं, ममता की मां सुमित्रा ने बताया कि प्रताप सिंह ने ही उनकी बेटी को भी पढ़ाया और अब वे सेना में जाकर देश व परिवार का नाम रोशन करेगी। आर्मी मेडिकल कोर में भर्ती होने के बाद अब अलग-अलग राज्य में ज्वानिंग मिली है।
प्रीति देशवाल कोलकाता में पढ़ी है और तमिलनाडु के वैलिंगटन ऊटी में मिलिट्री अस्पताल में काम करेगी। मुंबई में पढ़ी दीप्ति को यूपी के आगरा में ज्वानिंग मिली है। पुणे के आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज में पढ़ी ममता को उत्तराखंड के रानीखेत में ज्वानिंग मिली है।